कोरबा/दीपका। कोरबा ज़िले के SECL प्रभावित पाँच गाँवों में आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, ग्रामसभा सशक्तिकरण और भूमि संरक्षण को लेकर एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आगामी 10 दिसंबर को बूढ़ादेव स्थल में ‘बूढ़ादेव सामाजिक एकता वार्षिक सम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन कृष्ण उइके जी की अध्यक्षता में संपन्न होगा।

इस कार्यक्रम में झाबर, सिरकी खुर्द, बेल्टीकरी, बतारी और चैनपुर पंचायतों के गोंड समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराएँगे।
SECL परियोजनाओं से प्रभावित गाँव — भूमि, पर्यावरण और विस्थापन के मुद्दे प्रमुख“धरती आबा की गूंज से गुंजायमान हुआ शिवनंदनपुर — बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासी समाज का ऐतिहासिक आयोजन”
इन पाँचों गाँवों के लोग कोल इंडिया की सहायक कंपनी SECL की परियोजनाओं से वर्षों से प्रभावित रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन के चलते—
खेती योग्य भूमि कम हुई, जलस्रोतों पर दबाव बढ़ा, पर्यावरण प्रदूषित हुआ, और कई परिवार विस्थापन की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

साथ ही यह पूरा क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची में आता है, जहाँ PESA और FRA कानून पूरी तरह लागू हैं, जिनके तहत ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि हस्तांतरण, खरीदी–बिक्री या कब्ज़ा कानूनी रूप से अमान्य है।

ग्रामसभा की अनदेखी कर अवैध भूमि लेनदेन का आरोप स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि संवैधानिक सुरक्षा होने के बावजूद बाहरी व्यक्तियों और दलाल तत्वों द्वारा ग्रामसभा की अनुमति के बिना अवैध भूमि रजिस्ट्री, कब्ज़ा और खरीद–फरोख्त बढ़ी है।
इसी गंभीर मुद्दे पर रोकथाम और सामूहिक रणनीति बनाना सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रहेगा। सम्मेलन की व्यापक तैयारियाँ — गाँव–गाँव बैठकों का दौर 
कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सर्कल की कार्यकारिणी समिति लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकों का आयोजन कर रही है, जिनमें इन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है— भूमि विवाद और अवैध लेनदेन
पुनर्वास और विस्थापन
खनन से प्रभावित खेत तथा सिंचाई की समस्या
रोजगार के अवसर
पारंपरिक संस्कृति, देवस्थल और सामुदायिक पहचान का संरक्षण
सम्मेलन में गोंड समाज के वरिष्ठजन, युवा, महिलाएँ एवं विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
वीर नारायण सिंह जयंती पर विशेष महत्व
यह सम्मेलन शहीद वीर नारायण सिंह की जयंती पर आयोजित किया जा रहा है, जिससे आयोजन का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है।
आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, ग्रामसभा की शक्ति और भूमि संरक्षण को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।
समुदाय का विश्वास है कि एकजुट होकर आवाज़ उठाने से क्षेत्र में बढ़ती अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी तथा SECL प्रभावित गाँवों की समस्याओं के समाधान की स्पष्ट दिशा तैयार होगी।

प्रकाश कोर्राम ,कार्यकारिणी सदस्य ,
बूढ़ादेव सामाजिक एकता वार्षिक सम्मेलन
Author: Shambhoo Dwip
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