कोरबा/गुरसिया – ग्राम पंचायत लेपरा बांधापारा, गुरसिया में एक दिवसीय सामाजिक संगोष्ठी एवं मार्को सर जी का अवतरण दिवस गरिमामय रूप से सम्पन्न

ग्राम पंचायत लेपरा बांधापारा, गुरसिया में आज एक दिवसीय सामाजिक संगोष्ठी एवं आदरणीय तिरूमाल रघुवीर सिंह मार्को (मार्को सर) के अवतरण/जन्मदिवस का आयोजन अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज में इतिहास-बोध, शिक्षा, भाषा, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक जागरूकता को सशक्त करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम बुढा देव स्थल पर पेन-पुरखाओं की परंपरागत मार्को सर सेवा गोंगो के साथ नमन कर किया गया। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार गोंड जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर संगोष्ठी की औपचारिक शुरुआत हुई।
जन्मदिवस समारोह एवं बच्चों के प्रति स्नेह
संगोष्ठी के दौरान सभी अतिथियों व उपस्थित जनसमुदाय का स्वागत किया गया। जन्मदिवस के अवसर पर मार्को सर जी ने केक काटा तथा बच्चों को केक, मिठाई एवं उपहार वितरित किए। बच्चों के साथ उनका आत्मीय व्यवहार पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।
वक्ताओं के विचार – समाज, शिक्षा और जागरूकता
जय सिंह मरावी (पूर्व डीएसपी) ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज को शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करते रहना चाहिए। उन्होंने मार्को सर जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए समाज के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

संतोषी पेंद्रो जी (जनपद अध्यक्ष, पोड़ी उपरोड़ा) ने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे सामाजिक कार्यक्रम समाज में जागरूकता लाते हैं। जितना समाज जागरूक होगा, उतनी ही तेज़ी से प्रगति करेगा। उन्होंने भी मार्को सर जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई दी।
शिवनारायण पोर्ते जी (पूर्व सभापति, तिवरता महासभा) ने भावुक शब्दों में शहीद वीर नारायण सिंह जी को नमन करते हुए कहा कि समाज से बड़ा कुछ नहीं है। उन्होंने समाज के हर सदस्य से जागरूक होने का आह्वान किया और शिक्षा के क्षेत्र में गोंड समुदाय की स्थिति पर आत्ममंथन की आवश्यकता बताई। अंत में उन्होंने मार्को सर जी से शिक्षा पर विशेष मार्गदर्शन देने का निवेदन किया।


मार्को सर जी ने अपने वक्तव्य की शुरुआत प्रकृति शक्ति एवं पेन-पुरखाओं को नमन से की। उन्होंने आयोजक मंडल, युवा शक्ति, कर्मचारी संघ एवं महिला समिति बांधापारा को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि जन्मदिवस पर मिला यह स्नेह उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और खुशी होती यदि अधिक लोग गोंडी भाषा समझते, क्योंकि वे स्वयं गोंडी भाषी हैं।
इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बच्चों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से बताया कि अपने इतिहास को जानना क्यों आवश्यक है। उन्होंने कहा—जो समाज अपना इतिहास नहीं जानता, वह इतिहास नहीं लिख सकता। उन्होंने आदिवासी समाज की जनसंख्या, आर्थिक शोषण, शराब की समस्या, जल-जंगल-जमीन के विनाश, कुपोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर तथ्यात्मक और तीखे शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ बीच के दलालों के कारण बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा।
उच्च शिक्षा के इच्छुक बच्चों को उन्होंने सरकारी निशुल्क शिक्षा योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया और जानकारी के अभाव में सरपंच या शंभू शक्ति सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सांडिल से संपर्क करने का सुझाव दिया। अंत में सगा समाज के साथ सामूहिक भोजन किया गया।

गोंडी भाषा और शोध पर विशेष वक्तव्य

गणेश मरपच्ची जी (पुनेमाचार्य एवं शोधकर्ता) ने कहा कि जब तक गोंडी भाषा नहीं जानेंगे, तब तक संघर्ष अधूरा रहेगा। उन्होंने गोंडी भाषा में अपना परिचय देते हुए बच्चों से आग्रह किया कि वे दैनिक जीवन में गोंडी भाषा का प्रयोग करें। उन्होंने गोंडी भाषा में मार्को सर जी को जन्मदिवस की बधाई—
“नीकुन पुट्टीना ता, वला-वला बिराई”
देते हुए बताया कि उनका नया शोध कार्य प्रगतिशील है, जिसका सारांश उन्होंने सांसद महोदया को प्रेषित किया है।
अध्यक्षता एवं गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रकला पोर्ते जी (सरपंच, लेपरा बांधापारा) ने की। आयोजन में समाज के अनेक वरिष्ठजन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शंभू शक्ति सेना के पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से— कार्यक्रम अध्यक्ष चंद्रकला पोर्ते जी का अध्यक्षीय वक्तव्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चंद्रकला पोर्ते जी (सरपंच, ग्राम पंचायत लेपरा बांधापारा) ने हर्ष और गर्व के साथ अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का दिन पूरे गांव एवं पंचायत के लिए अत्यंत गौरव का दिन है, क्योंकि आदिवासी समाज के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले, समाज को सही दर्पण दिखाने वाले और दूरदर्शी चिंतक आदरणीय रघुवीर सिंह मार्को जी का जन्मदिवस हमारे गांव में एक छोटी-सी सामाजिक संगोष्ठी के रूप में मनाया जा रहा है।
चंद्रकला जी ने कहा कि मेरे गांव की ओर से, मेरी ग्राम पंचायत की ओर से और समस्त ग्रामवासियों की ओर से मैं मार्को सर जी को जन्मदिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई देती हूं। यह हमारे लिए इसलिए भी विशेष गौरव का विषय है क्योंकि मार्को सर जी को आदिवासी समाज के ऐसे बुद्धिजीवियों में गिना जाता है, जो समाज को दूरदृष्टि से परखते हैं, उसकी समस्याओं को समझते हैं और समाधान की दिशा दिखाते हैं। इसी दूरदर्शिता और समाजसेवा के कारण उन्हें भास्कर एक्सीलेंस अवार्ड–2024 (मलेशिया) से सम्मानित किया गया।
उन्होंने आगे कहा कि हमें भली-भांति ज्ञात है कि मार्को सर जी हम सभी के चहेते मार्गदर्शक हैं। वे समाज में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चेतना जगाने वाले प्रेरणास्रोत हैं। आदिवासी समाज को संगठित कर उसे वैचारिक मजबूती देने वाले आदिवासी शक्तिपीठ के संरक्षक के रूप में उनका योगदान अतुलनीय है। साथ ही, गांव-गांव जाकर शपथ के माध्यम से समाज को जागरूक करने वाली शंभू शक्ति सेना के वे संस्थापक हैं, जो निरंतर समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य के अंत में चंद्रकला पोर्ते जी ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व का हमारे गांव में आना और उनके जन्मदिवस पर यह आयोजन होना, हम सभी के लिए प्रेरणा और सम्मान का विषय है। उन्होंने पुनः मार्को सर जी को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं समाजसेवा के इस पथ पर निरंतर अग्रसर रहने की शुभकामनाएं देते हुए अपने वक्तव्य को विराम दिया।
जय सिंह मरावी (पूर्व डीएसपी), डॉ. ज्योत्स्ना मार्को जी, शिवनारायण पोर्ते, विक्रम मरकाम, रोशन मंडावी, धर्मेन्द्र ध्रुव, राकेश सांडिल (प्रदेश अध्यक्ष), प्रविन पालिया, गणेश मरपच्ची जी, फत्ते सिंह राज मरपच्ची जी, संतोषी पेंद्रो जी, सरजू मांझी, महिपाल उईके, मनोज मरावी, खेलन कोर्चे, उमाशंकर मरपच्ची जी, राज कुमार धनवार जी, कार्तिक मरकाम जी, सुनील राठिया, विरेंद्र राठिया, विजय बहादुर कोराम जी, पुरन सिंह राज, सरस्वती आर्मो, धरम सिंह कुसरो, रमइया नेटी, सुमेर सिंह नेटी, संत कुमार श्याम, कृष्ण सिंह नेटी, सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
यह एक दिवसीय सामाजिक संगोष्ठी केवल जन्मदिवस समारोह नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, भाषा, शिक्षा, अधिकार और भविष्य पर गहन चिंतन का सशक्त मंच बनी। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जागरूकता, शिक्षा और अपनी भाषा-संस्कृति से जुड़ाव ही समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बना सकता है।
Author: Shambhoo Dwip
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