शहीद वीर नारायण सिंह शहादत दिवस व गुरु घासीदास जयंती पर कार्यक्रम, सामाजिक मांगों को लेकर सौंपा गया ज्ञापन
सूरजपुर।
जिला सूरजपुर के गोपालपुर अंतर्गत खरीखाडाड़ में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह जी के शहादत दिवस एवं संत शिरोमणि गुरु घासीदास जी की जयंती के अवसर पर श्रद्धा, सामाजिक चेतना और अधिकारों की मांग के साथ भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत महगांवा स्थित शहीद वीर नारायण सिंह चौक में सतरंगी ध्वज फहराकर की गई। इसके पश्चात खरीखाडाड़ में भी सतरंगी ध्वज स्थापित किया गया। शहीद वीर नारायण सिंह एवं संत गुरु घासीदास जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
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इस अवसर पर सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान को उचित सम्मान देने, आदिवासी-मूलनिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, शिक्षा-रोजगार से जुड़ी मांगों को प्रमुखता से रखा गया। ज्ञापन में संत गुरु घासीदास जी के “सत्य, अहिंसा और मानव समानता” के विचारों को शासन-प्रशासन की नीतियों में प्रभावी रूप से लागू करने की मांग भी की गई।
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वक्ताओं ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का संघर्ष आज भी समाज को अन्याय के खिलाफ खड़ा होने की प्रेरणा देता है, जबकि गुरु घासीदास जी का संदेश सामाजिक समरसता और समतामूलक समाज की नींव है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामाजिक एकता को मजबूत करने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम में मोतीलाल पैकरा (जिला संरक्षक), बृज मोहन सिंह गोंड (जिला अध्यक्ष, सूरजपुर), मंत्रीलाल बियार (जिला महासचिव), बंदरूप पैकरा (उपाध्यक्ष), सुमन टोप्पो (उपाध्यक्ष), उषा सिंह कोर्राम (पूर्व जिला पंचायत सदस्य), जेम्स कुजूर (जिला सचिव), अजय सिंह (पार्षद), मोहर साय पोर्ते (पूर्व सरपंच), विजय मरपच्ची (जिला अध्यक्ष, गोंडवाना गोंड महासभा सूरजपुर) तथा राकेश सांडिल (प्रदेश अध्यक्ष, शंभू शक्ति सेना छत्तीसगढ़) सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
ऋण पुस्तिका अनिवार्यता समाप्त करने के आदेश पर आदिवासी समाज में असंतोष, निरस्तीकरण की मांग तेज

सूरजपुर/सरगुजा/ रायपुर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ शासन के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1682/तक./2025 (दिनांक 16 अक्टूबर 2025), जिसमें दस्तावेज़ पंजीयन के दौरान ऋण पुस्तिका (किसान किताब) की अनिवार्यता समाप्त की गई है, को लेकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में असंतोष गहराता जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, जिला इकाई सूरजपुर ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव एवं कलेक्टर सूरजपुर को ज्ञापन सौंपकर आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। समाज का कहना है कि राज्य का लगभग 61% क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां अधिकांश किसान आज भी डिजिटल संसाधनों से वंचित हैं। ऐसे में ऋण पुस्तिका भूमि स्वामित्व का सबसे विश्वसनीय दस्तावेज़ है।
ज्ञापन में भुइयाँ पोर्टल पर 1991–95 की त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि त्रुटियां सुधारे बिना ऋण पुस्तिका हटाने से फर्जी रजिस्ट्री और जमीन हड़पने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही, पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की भूमिका को नजरअंदाज करना पांचवीं अनुसूची की भावना के विपरीत है।

आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
प्रमुख मांगें
ऋण पुस्तिका अनिवार्यता समाप्त करने वाला आदेश निरस्त हो
पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में किसानों को विशेष संरक्षण मिले
भुइयाँ पोर्टल की त्रुटियां पहले सुधारी जाएं
भूमि पंजीयन में ग्राम सभा की सहमति सुनिश्चित हो
Author: Shambhoo Dwip
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