दिपका – “विरोध के बीच भी बूढ़ादेव सम्मेलन ऐतिहासिक—सैकड़ों ग्रामीणों ने दिखाई अभूतपूर्व एकता”

📌 बूढ़ादेव सामाजिक एकता वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न

📌 विरोध के बावजूद सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति, सामाजिक एकता का अद्भुत प्रदर्शन

 

कोरबा/दीपका

10 दिसंबर शहीद वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस के अवसर पर सर्किल चैनपुर (सिरकी, झाबर, चैनपुर बेलटिकरी, बतारी) में आयोजित बूढ़ादेव सामाजिक एकता वार्षिक सम्मेलन का प्रथम वर्ष परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता के मजबूत संदेश के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। पाँचों गाँवों से पहुँचे सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और असाधारण बना दिया।अध्यक्षता एवं अतिथि-विशिष्ट उपस्थिति

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कार्यक्रम की अध्यक्षता बसंत कोर्राम ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में कटघोरा विधानसभा के विधायक माननीय प्रेमचंद पटेल शामिल हुए।

“जोबगा में गूंजा आदिवासी चेतना का बिगुल — रघुवीर सिंह मार्को और तुलेश्वर मरकाम के मार्गदर्शन में हुआ कोयतुर संदेश का भव्य विमोचन, हीरा-मोती पेनांजली दिवस बना आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक”

विशिष्ट अतिथियों में—

जनपद पंचायत कटघोरा की सभापति बसंत कंवर

चैनपुर सरपंच विनोद टेकाम

बतारी सरपंच राजलाल श्रोते

सिरकी सरपंच छतवाई सारोठिया

झाबर सरपंच रामसिंह कंवर

बिलटिकरी सरपंच गौरी कंवर

साथ ही पाँचों गाँवों के समाज प्रमुख (सियान) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

विरोध के बावजूद सम्मेलन रहा सफल

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ग्राम झाबर निवासी मंगलसिंह कोर्राम द्वारा बूढ़ादेव स्थल पर प्रस्तावित सम्मेलन एवं भूमि पूजन को लेकर तहसीलदार दीपका के समक्ष आपत्ति दर्ज की गई थी।

लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों की अभूतपूर्व उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि—

“समाज की एकता किसी भी विरोध से बड़ी होती है।”

यह आयोजन सामाजिक जागरूकता, एकजुटता और सामूहिक संकल्प का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता मन

सम्मेलन के दौरान—

पारंपरिक लोकनृत्य

सुआ नृत्य

मांदर–नगाड़े की थाप

महिलाओं एवं युवाओं की सामूहिक भागीदारी

ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

विचार–गोष्ठी में वक्ताओं ने शिक्षा, नेतृत्व, परंपरा संरक्षण और भाईचारा बढ़ाने पर जोर दिया।

अतिथियों के प्रेरक संबोधन

विधायक प्रेमचंद पटेल

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज जल–जंगल–ज़मीन के वास्तविक रक्षक हैं।

उन्होंने जनजातीय समाज के संघर्ष, गौरवशाली इतिहास और स्वाभिमान का उल्लेख करते हुए एकता बनाए रखने की अपील की।

साथ ही झाबर बूढ़ादेव पेन ठाना में सामुदायिक भवन के पुनर्निर्माण का आश्वासन भी दिया।

सभापति बसंत कंवर

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उन्होंने आदिवासी संस्कृति को विश्व की प्राचीन और महानतम संस्कृति बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

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बतारी सरपंच राजलाल श्रोते

उनके ऊर्जावान और प्रभावी संबोधन ने सभा में नया उत्साह भर दिया।

भविष्य के लिए संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि—

“अगले वर्षों में यह सम्मेलन और अधिक व्यापक, भव्य और संगठित रूप में आयोजित किया जाएगा।”

ताकि आने वाली पीढ़ियों तक हमारी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराएँ और सामाजिक एकता सुरक्षित एवं सशक्त रूप से पहुँच सके।

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Author: Shambhoo Dwip

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