सनसनीखेज खुलासा: कोरबा में SECL परियोजनाओं से उजड़े हजारों आदिवासी किसान — रोजगार, मुआवजा और पहचान संकट गहराया

कोरबा, छत्तीसगढ़ | 02 नवंबर 2025

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जिले में एसईसीएल (South Eastern Coalfields Limited) की खदान परियोजनाओं के कारण हजारों आदिवासी किसान और परिवार विस्थापित हो गए हैं। इन्हें न तो पूरा मुआवजा मिला है, न ही रोजगार और पुनर्वास की सुविधा।

इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) के युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष प्रकाश कोर्राम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली को ज्ञापन भेजकर विशेष जांच और दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।


🔸 हजारों परिवार प्रभावित, रोजगार नहीं मिला

ज्ञापन के अनुसार, कोरबा जिले के गेवरा, कुसमुंडा, दीपका और माइनकपुर खदान क्षेत्रों में 10,713 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहित की गई है।
इन परियोजनाओं से लगभग 15,976 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें अधिकांश परिवार आदिवासी किसान हैं।

गेवरा क्षेत्र में 7,058 भूमि प्रभावित लोगों में से केवल 2,081 को ही रोजगार दिया गया है। यानी लगभग 5,000 से अधिक आदिवासी युवा बेरोजगार हैं।
इसी तरह, दीपका और कुसमुंडा क्षेत्रों में भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बावजूद स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिला है।


🔸 मुआवजा और पुनर्वास में गंभीर अनियमितता

ज्ञापन में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान तय दरों पर मुआवजा नहीं दिया गया। कई प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली, जबकि कुछ को कम रकम देकर मामला बंद कर दिया गया।
कई मामलों में प्रशासन ने बिना सूचना के राशि घटा दी, जिससे प्रभावित लोगों में गहरा असंतोष है।


🔸 बाहरी लोगों को नौकरी, स्थानीय बेरोजगार

प्रकाश कोर्राम ने आरोप लगाया है कि एसईसीएल में बाहरी लोगों को फर्जी दस्तावेजों से नौकरी दी जा रही है, जबकि स्थानीय आदिवासी युवाओं को रोजगार से वंचित रखा गया है।
इससे क्षेत्र में बेरोजगारी और असंतोष बढ़ा है।


🔸 आंदोलन पर दमन का आरोप

ज्ञापन में कहा गया है कि जब भी प्रभावित लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तब उन पर सीआईएसएफ (CISF) जवानों द्वारा बल प्रयोग किया जाता है।
कई बार प्रदर्शनकारियों पर झूठे प्रकरण भी दर्ज किए गए। स्थानीय समुदाय ने इसे प्रशासन की दमनकारी नीति बताया है।


🔸 मुख्य मांगें

  1. सभी प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार दिया जाए।
  2. लंबित मुआवजा मामलों को जल्द निपटाने के लिए जिला स्तर पर समिति बनाई जाए।
  3. विस्थापित क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएँ तत्काल दी जाएँ।
  4. PESA, FRA और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 (LARR Act) का पालन सुनिश्चित किया जाए।
  5. बाहरी लोगों को दी गई नौकरियों की जांच की जाए और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
  6. DMF फंड से प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए जाएँ।

🔸 युवा और शिक्षा पर सुझाव

प्रकाश कोर्राम ने आयोग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में

  • केंद्रीय विद्यालय या आदर्श आवासीय विद्यालय खोले जाएँ,
  • डिजिटल लर्निंग लैब और जनजातीय भाषा शिक्षण केंद्र शुरू किए जाएँ,
  • खेल प्रतिभाओं के लिए छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

🔸 प्रकाश कोर्राम का निवेदन

प्रकाश कोर्राम ने आयोग से आग्रह किया है कि—

“संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत आदिवासी समाज के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित किया जाए। कोरबा जिले में चल रहे इस विस्थापन, बेरोजगारी और पहचान संकट की जांच की जाए ताकि आदिवासी समाज का जीवन, भूमि और सम्मान सुरक्षित रह सके।”


🔸 निष्कर्ष

कोरबा के आदिवासी आज भी अपनी जमीन और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
विकास के नाम पर जो परियोजनाएँ शुरू की गईं, उन्होंने हजारों परिवारों को विस्थापन और बेरोजगारी के गर्त में धकेल दिया है।
अब देखना यह होगा कि क्या राष्ट्रीय आयोग इन पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है।


रिपोर्ट: शंभूद्वीप न्यूज़ टीम
स्थान: कोरबा, छत्तीसगढ़
तिथि: 02 नवंबर 2025


 

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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