अंबिकापुर | दिनांक 16 जनवरी 2026
आदिवासी सोशल मीडिया क्रिएटर सम्मान समारोह अंबिकापुर में संपन्न
सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृति, पहचान और एकता को मजबूत करने का संदेश
सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर में आदिवासी समाज के युवाओं और सोशल मीडिया क्रिएटरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक भव्य आदिवासी सोशल मीडिया क्रिएटर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अंबिकापुर के अजीरमा स्थित गोंडवाना भवन में संपन्न हुआ, जहां सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों से आए सोशल मीडिया क्रिएटरों, समाजसेवियों और युवाओं की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज के युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और सामाजिक मुद्दों को दुनिया के सामने रखने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी परंपरा के अनुसार गोंडवाना पेनठाना (देव स्थल) में पेन अर्जी कर की गई। इस दौरान समाज के भूमका पुजारी द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की सफलता और समाज की उन्नति की कामना की गई। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों, समाज के वरिष्ठजनों तथा सोशल मीडिया क्रिएटरों का अक्षत-तिलक लगाकर और पारंपरिक गमछा पहनाकर स्वागत किया गया।

इस अवसर पर सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों — सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और एमसीबी — से आए सोशल मीडिया क्रिएटरों का परिचय कराया गया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह उत्साह और सामाजिक जागरूकता से भरा हुआ था। उपस्थित युवाओं में अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति गर्व का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

सोशल मीडिया से मजबूत हो रही आदिवासी पहचान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज सरगुजा के कार्यकारी अध्यक्ष अनुक सिंह टेकाम ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया एक बहुत ही प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया अक्सर आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और मुद्दों को पर्याप्त स्थान नहीं देता। लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से आदिवासी युवा स्वयं अपने समाज की आवाज बन रहे हैं और अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने ला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज कई युवा फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आदिवासी जीवनशैली, लोककला, लोकगीत, पारंपरिक त्योहार, रीति-रिवाज और सामाजिक समस्याओं को सामने ला रहे हैं। यह समाज के लिए एक सकारात्मक पहल है और इससे आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं बल्कि समाज के उत्थान, शिक्षा और जागरूकता के लिए भी करें।
समाज को अंगूर की गुच्छी की तरह रहना होगा संगठित
कार्यक्रम में उपस्थित सर्व आदिवासी समाज सरगुजा के जिला अध्यक्ष डॉ. अमृत सिंह मरावी ने अपने संबोधन में समाज की एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अंगूर की गुच्छी की तरह एकजुट होकर रहना चाहिए। जब अंगूर एक साथ गुच्छी में रहते हैं तो उनकी मजबूती बनी रहती है, लेकिन अलग-अलग होने पर वे कमजोर हो जाते हैं। 
उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनका सामना केवल एकता और संगठन के माध्यम से ही किया जा सकता है। यदि समाज के लोग मिलकर कार्य करें तो शिक्षा, रोजगार, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
युवाओं को समाज के मुद्दों पर उठानी होगी आवाज
जिला सचिव तरुण भगत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवाओं से समाज के मुद्दों को लेकर जागरूक रहने और एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज ऐसा मंच है जहां से समाज की समस्याओं को व्यापक स्तर पर उठाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को जिम्मेदारी के साथ उठाएं और समाज के हित में सकारात्मक पहल करें।
समाज और संस्कृति को बचाने युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
गोंड समाज विकास समिति के संभागीय कार्यकारी अध्यक्ष सजेंद्र प्रसाद मरकाम ने कहा कि समाज और संस्कृति को बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ जुड़ी हुई है और इसमें जीवन जीने की अनूठी परंपराएं हैं।
उन्होंने कहा कि आज आधुनिकता के दौर में कई पारंपरिक मूल्य धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपनी संस्कृति, भाषा, गीत-संगीत और परंपराओं को संरक्षित करने का कार्य करें।
“अबुआ दिसुम अबुआ राज” के नारों से गूंजा कार्यक्रम
कार्यक्रम के संयोजक एवं सर्व आदिवासी समाज सूरजपुर के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने अपने जोशीले संबोधन से युवाओं में उत्साह भर दिया। उन्होंने “अबुआ दिसुम अबुआ राज” और “मावा नाटे मावा राज” जैसे पारंपरिक नारों के माध्यम से सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक जागरूकता का संदेश दिया।
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उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों और पहचान के लिए जागरूक होना जरूरी है। इसके लिए शिक्षा और संगठन दोनों ही आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे सोशल मीडिया को केवल मनोरंजन का साधन न बनाएं, बल्कि इसे समाज के विकास और जागरूकता का माध्यम बनाएं।
“गोटूल” को ब्रांड बनाने की योजना
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बीपीएस पोया ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण विचार भी रखा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्था “गोटूल” केवल एक सांस्कृतिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह आदिवासी जीवनशैली, शिक्षा और सामाजिक संगठन का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यदि “गोटूल” की अवधारणा को आधुनिक रूप में विकसित किया जाए तो इसे एक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सकता है। इसके माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और समाज आर्थिक रूप से भी मजबूत हो सकता है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में गोटूल के माध्यम से आवासीय स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य सामाजिक संस्थाएं संचालित करने की योजना भी बनाई जा सकती है। इससे समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सही उपयोग जरूरी
कार्यक्रम में सोशल मीडिया के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बीपीएस पोया ने कहा कि आज इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म युवाओं के लिए अपनी प्रतिभा और विचारों को दुनिया तक पहुंचाने का बड़ा माध्यम बन चुके हैं।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया पर प्रामाणिक और तथ्यपूर्ण कंटेंट बनाएं। गलत जानकारी या भ्रामक सामग्री से समाज को नुकसान हो सकता है, इसलिए जिम्मेदारी के साथ कंटेंट बनाना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही सोशल मीडिया क्रिएटरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और सेमिनार आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बन सकें।
युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह
कार्यक्रम में आदिवासी सोशल मीडिया क्रिएटर सुरंजना पोर्ते ने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नशा किसी भी समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाना चाहिए और शिक्षा, खेल, कला तथा समाज सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।
गीत-संगीत के माध्यम से संस्कृति का संरक्षण
सोशल मीडिया क्रिएटर दीपक मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसके गीत-संगीत, नृत्य और लोककलाओं में बसती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से इन पारंपरिक कलाओं को दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने लोकगीत, नृत्य, त्योहार और पारंपरिक वाद्ययंत्रों को डिजिटल माध्यम से प्रचारित करें ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन्हें जान सकें।
लाखों फॉलोवर वाले क्रिएटर ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम में सोशल मीडिया क्रिएटर मनोज नागवंशी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे फेसबुक पर खेल से संबंधित सामग्री साझा करते हैं और उनके लाखों फॉलोवर हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है एक स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर मेहनत। यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी से लगातार अच्छा कंटेंट बनाता है तो उसे निश्चित रूप से सफलता मिलती है।
प्रतिभावान क्रिएटरों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभावान आदिवासी सोशल मीडिया क्रिएटरों को माला, पुष्प, प्रशस्ति-पत्र और पारंपरिक गमछा भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह का उद्देश्य उन युवाओं को प्रोत्साहित करना था जो सोशल मीडिया के माध्यम से समाज की संस्कृति, कला, खेल, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं।
सम्मान प्राप्त करने वाले क्रिएटरों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार सोशल मीडिया ने उन्हें अपनी प्रतिभा को पहचान दिलाने का अवसर दिया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में कवल बिहारी सिंह टेकाम, हूल सिंह, दिनेश टोप्पो, रामनिवास टेकाम, सोहित सिंह पोया, कृष्णा कुमार, मनोज सिंह पोया, लवसाय कुसरो, भूमका पुजारी, गौलेश, संजय कोर्राम, हीरा साय उईके, गुरुदयाल सिंह, सूरतिया सिंह, शंभू सिंह खेरवार, अंजली मरावी, सविता पण्डो, गौरी शंकर नेताम, सुमन श्याम, श्रेया भगत, गोपीचंद नगेशिया, शिव प्रताप सिंह आयाम, सितेंद्र सिंह, चंद्रशेखर सिंह, लक्ष्मण सिंह आर्मो, कृष्ण कुमार सिंह, प्रवीण सिंह, गुलाब सिंह नेताम, लता लहरें, रितु डहरिया, चरण कुमार चौधरी, चंदन कुमार रवि, सितारा सिंह पोर्ते, पिंकी सिंह, जमराज, अनीता पैकरा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन दीपक धुर्वे द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों के लिए अल्पाहार और भोजन की व्यवस्था भी की गई।
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
अंबिकापुर में आयोजित यह आदिवासी सोशल मीडिया क्रिएटर सम्मान समारोह समाज के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि युवा अपनी संस्कृति और समाज के प्रति जागरूक होकर आधुनिक तकनीक का उपयोग करें तो वे समाज की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं।
यह आयोजन न केवल सोशल मीडिया क्रिएटरों के सम्मान का मंच बना, बल्कि आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
Author: Shambhoo Dwip
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