रायगढ़/कापू, छत्तीसगढ़।
!! जय जोहार !!
!! जय ठाकुर देव !!
दिनांक 21 मई 2026, गुरुवार एवं 22 मई 2026, शुक्रवार को ग्राम चटकपुर (विजयनगर), तहसील कापू, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में दो दिवसीय “ठाकुर देव गुड़ी स्थापना” एवं वार्षिक सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल समाज की धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण एवं समाज के समग्र विकास के संकल्प को भी मजबूत किया। कार्यक्रम में दूर-दूर से हजारों की संख्या में समाजजन, जनप्रतिनिधि, युवा, महिलाएं एवं ग्रामीणजन शामिल हुए।
पूरा ग्राम चटकपुर इन दो दिनों तक सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना रहा। गांव का वातावरण पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों, मांदर की थाप, सुआ नृत्य एवं सामाजिक भाईचारे से सराबोर दिखाई दिया। आयोजन स्थल को पारंपरिक सजावट, ध्वज, रंगोली एवं धार्मिक प्रतीकों से विशेष रूप से सजाया गया था, जिसने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय श्री चंद्रवंशी राठिया कंवर समाज उत्थान समिति, ठाकुर देव ट्रस्ट तथा छत्तीसगढ़ राठिया कंवर विकासशील समाज के युवा प्रभाग एवं महिला प्रभाग के पदाधिकारीगण विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज प्रमुखों, सम्मानित जनप्रतिनिधियों, विधायकगण, जनपद सदस्य, सरपंच, पंच प्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
पारंपरिक पूजा-अर्चना एवं गुड़ी स्थापना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना एवं ठाकुर देव की आराधना के साथ किया गया। समाज के वरिष्ठजनों एवं पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार “ठाकुर देव गुड़ी स्थापना” की गई। इस दौरान उपस्थित समाजजनों ने समाज की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं एकता के लिए प्रार्थना की।
गुड़ी स्थापना कार्यक्रम समाज की आस्था एवं परंपरा का प्रतीक रहा। समाज के बुजुर्गों ने युवाओं को बताया कि “ठाकुर देव” समाज की संस्कृति, प्रकृति एवं सामुदायिक चेतना के प्रमुख आधार हैं। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की पहचान एवं सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
संस्कृति एवं परंपरा के संरक्षण का संदेश
दो दिवसीय आयोजन के दौरान विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें समाज की पारंपरिक लोक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। महिलाओं एवं युवतियों द्वारा प्रस्तुत सुआ नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। मांदर, ढोल एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर समाज के युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखना है तो ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देना होगा। समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, लोककला एवं परंपराओं से होती है और यही हमारी सबसे बड़ी धरोहर है।
महिला प्रभाग की पदाधिकारीयों ने कहा कि समाज की महिलाएं संस्कृति संरक्षण की सबसे बड़ी वाहक हैं। घर-परिवार से लेकर सामाजिक आयोजनों तक महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बच्चों को संस्कार, परंपरा एवं समाज की पहचान से जोड़ने में मातृशक्ति की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता पर विशेष जोर
सम्मेलन में समाज के विकास एवं उत्थान को लेकर विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने शिक्षा को समाज के विकास का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षित समाज ही प्रगति कर सकता है। समाज के बच्चों एवं युवाओं को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई परिवार शिक्षा के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। समाज के संपन्न एवं जागरूक लोगों को आगे आकर जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करनी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
युवा प्रभाग के सदस्यों ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे एवं सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा, खेल एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ें। समाज के विकास में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और यदि युवा संगठित होकर सकारात्मक दिशा में कार्य करें तो समाज नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
नशामुक्ति एवं सामाजिक सुधार पर चिंतन
सम्मेलन के दौरान समाज में बढ़ती नशाखोरी एवं सामाजिक कुरीतियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि नशा समाज एवं परिवार दोनों को कमजोर करता है। इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और सामाजिक वातावरण भी खराब होता है।
समाज प्रमुखों ने युवाओं एवं अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहें एवं अपने बच्चों को भी जागरूक करें। गांव-गांव में नशामुक्ति अभियान चलाने की आवश्यकता बताई गई ताकि समाज को स्वस्थ एवं सशक्त बनाया जा सके।
इसके साथ ही सामाजिक एकता, आपसी सहयोग एवं भाईचारे को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब सभी लोग मिलजुलकर कार्य करें एवं छोटे-छोटे मतभेदों को भुलाकर समाजहित में एकजुट हों।
खेती-किसानी एवं ग्रामीण विकास पर चर्चा
सम्मेलन में खेती-किसानी एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और किसानों की स्थिति मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक खेती, जल संरक्षण, जैविक कृषि एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई।
कई वक्ताओं ने कहा कि युवा पीढ़ी को खेती से जोड़ना भी समय की मांग है। आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है। समाज के किसानों को संगठित होकर खेती के क्षेत्र में नए प्रयोग करने चाहिए।
समाज की एकता का दिखा अद्भुत उदाहरण
इस आयोजन में समाज की एकता एवं सामूहिक शक्ति का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। दूर-दराज के गांवों से आए समाजजन एक मंच पर एकत्रित हुए और समाज के विकास एवं संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में हर वर्ग एवं आयु वर्ग के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।
वरिष्ठ समाज प्रमुखों ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। यदि समाज संगठित रहेगा तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होगी। समाज के हर व्यक्ति को सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संगठन को मजबूत बनाने के लिए आगे आना चाहिए।
अतिथियों का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाज के वरिष्ठजनों, अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक रूप से स्वागत एवं सम्मान किया गया। अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में नई चेतना एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने समाज की मांगों एवं समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि समाज की संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
आयोजन समिति की सराहनीय भूमिका
इस विशाल एवं सफल आयोजन के पीछे आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों की मेहनत एवं समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए युवाओं, महिलाओं एवं समाज के वरिष्ठजनों ने लगातार सहयोग किया।
भोजन व्यवस्था, आवास, स्वागत, मंच संचालन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आयोजन समिति की कार्यशैली की सभी ने सराहना की। ग्रामीणों ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत कर समाज की परंपरागत अतिथि सत्कार संस्कृति का परिचय दिया।
महिलाओं एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में महिलाओं एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। महिला प्रभाग की सदस्याओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं सामाजिक चर्चा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं युवा प्रभाग के सदस्यों ने कार्यक्रम संचालन, व्यवस्था एवं समाज जागरूकता अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
युवाओं ने समाज की एकता एवं विकास के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि समाज की संस्कृति एवं परंपरा को आगे बढ़ाना युवाओं की जिम्मेदारी है और इसके लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे।
समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प
सम्मेलन के समापन अवसर पर समाज प्रमुखों एवं आयोजन समिति द्वारा समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की उन्नति के लिए शिक्षा, संगठन एवं सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे सम्मेलन एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि समाज के लोगों के बीच संवाद एवं सहयोग की भावना बनी रहे।
आभार एवं शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों, समाजजनों, ग्रामवासियों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। समाज के लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए इस आयोजन को ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर समाज के सभी लोगों में उत्साह एवं खुशी का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।
यह दो दिवसीय आयोजन समाज की संस्कृति, परंपरा, धार्मिक आस्था एवं सामाजिक एकता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम ने समाज को संगठित होकर शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक जागरूकता एवं विकास की दिशा में आगे बढ़नेग्राम चटकपुर (विजयनगर) में दो दिवसीय “ठाकुर देव गुड़ी स्थापना” एवं वार्षिक सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न
समाज की संस्कृति, परंपरा एवं एकता का अद्भुत संगम बना ऐतिहासिक आयोजन
रायगढ़/कापू, छत्तीसगढ़।
!! जय जोहार !!
!! जय ठाकुर देव !!
दिनांक 21 मई 2026, गुरुवार एवं 22 मई 2026, शुक्रवार को ग्राम चटकपुर (विजयनगर), तहसील कापू, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में दो दिवसीय “ठाकुर देव गुड़ी स्थापना” एवं वार्षिक सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल समाज की धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण एवं समाज के समग्र विकास के संकल्प को भी मजबूत किया। कार्यक्रम में दूर-दूर से हजारों की संख्या में समाजजन, जनप्रतिनिधि, युवा, महिलाएं एवं ग्रामीणजन शामिल हुए।
पूरा ग्राम चटकपुर इन दो दिनों तक सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना रहा। गांव का वातावरण पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों, मांदर की थाप, सुआ नृत्य एवं सामाजिक भाईचारे से सराबोर दिखाई दिया। आयोजन स्थल को पारंपरिक सजावट, ध्वज, रंगोली एवं धार्मिक प्रतीकों से विशेष रूप से सजाया गया था, जिसने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय श्री चंद्रवंशी राठिया कंवर समाज उत्थान समिति, ठाकुर देव ट्रस्ट तथा छत्तीसगढ़ राठिया कंवर विकासशील समाज के युवा प्रभाग एवं महिला प्रभाग के पदाधिकारीगण विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज प्रमुखों, सम्मानित जनप्रतिनिधियों, विधायकगण, जनपद सदस्य, सरपंच, पंच प्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
पारंपरिक पूजा-अर्चना एवं गुड़ी स्थापना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना एवं ठाकुर देव की आराधना के साथ किया गया। समाज के वरिष्ठजनों एवं पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार “ठाकुर देव गुड़ी स्थापना” की गई। इस दौरान उपस्थित समाजजनों ने समाज की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं एकता के लिए प्रार्थना की।
गुड़ी स्थापना कार्यक्रम समाज की आस्था एवं परंपरा का प्रतीक रहा। समाज के बुजुर्गों ने युवाओं को बताया कि “ठाकुर देव” समाज की संस्कृति, प्रकृति एवं सामुदायिक चेतना के प्रमुख आधार हैं। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की पहचान एवं सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
संस्कृति एवं परंपरा के संरक्षण का संदेश
दो दिवसीय आयोजन के दौरान विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें समाज की पारंपरिक लोक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। महिलाओं एवं युवतियों द्वारा प्रस्तुत सुआ नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। मांदर, ढोल एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर समाज के युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखना है तो ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देना होगा। समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, लोककला एवं परंपराओं से होती है और यही हमारी सबसे बड़ी धरोहर है।
महिला प्रभाग की पदाधिकारीयों ने कहा कि समाज की महिलाएं संस्कृति संरक्षण की सबसे बड़ी वाहक हैं। घर-परिवार से लेकर सामाजिक आयोजनों तक महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बच्चों को संस्कार, परंपरा एवं समाज की पहचान से जोड़ने में मातृशक्ति की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता पर विशेष जोर
सम्मेलन में समाज के विकास एवं उत्थान को लेकर विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने शिक्षा को समाज के विकास का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षित समाज ही प्रगति कर सकता है। समाज के बच्चों एवं युवाओं को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई परिवार शिक्षा के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। समाज के संपन्न एवं जागरूक लोगों को आगे आकर जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करनी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
युवा प्रभाग के सदस्यों ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे एवं सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा, खेल एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ें। समाज के विकास में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और यदि युवा संगठित होकर सकारात्मक दिशा में कार्य करें तो समाज नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
नशामुक्ति एवं सामाजिक सुधार पर चिंतन
सम्मेलन के दौरान समाज में बढ़ती नशाखोरी एवं सामाजिक कुरीतियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि नशा समाज एवं परिवार दोनों को कमजोर करता है। इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और सामाजिक वातावरण भी खराब होता है।
समाज प्रमुखों ने युवाओं एवं अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहें एवं अपने बच्चों को भी जागरूक करें। गांव-गांव में नशामुक्ति अभियान चलाने की आवश्यकता बताई गई ताकि समाज को स्वस्थ एवं सशक्त बनाया जा सके।
इसके साथ ही सामाजिक एकता, आपसी सहयोग एवं भाईचारे को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब सभी लोग मिलजुलकर कार्य करें एवं छोटे-छोटे मतभेदों को भुलाकर समाजहित में एकजुट हों।
खेती-किसानी एवं ग्रामीण विकास पर चर्चा
सम्मेलन में खेती-किसानी एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और किसानों की स्थिति मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक खेती, जल संरक्षण, जैविक कृषि एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई।
कई वक्ताओं ने कहा कि युवा पीढ़ी को खेती से जोड़ना भी समय की मांग है। आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है। समाज के किसानों को संगठित होकर खेती के क्षेत्र में नए प्रयोग करने चाहिए।
समाज की एकता का दिखा अद्भुत उदाहरण
इस आयोजन में समाज की एकता एवं सामूहिक शक्ति का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। दूर-दराज के गांवों से आए समाजजन एक मंच पर एकत्रित हुए और समाज के विकास एवं संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में हर वर्ग एवं आयु वर्ग के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।
वरिष्ठ समाज प्रमुखों ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। यदि समाज संगठित रहेगा तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होगी। समाज के हर व्यक्ति को सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए संगठन को मजबूत बनाने के लिए आगे आना चाहिए।
अतिथियों का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाज के वरिष्ठजनों, अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक रूप से स्वागत एवं सम्मान किया गया। अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में नई चेतना एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने समाज की मांगों एवं समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि समाज की संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
आयोजन समिति की सराहनीय भूमिका
इस विशाल एवं सफल आयोजन के पीछे आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों की मेहनत एवं समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए युवाओं, महिलाओं एवं समाज के वरिष्ठजनों ने लगातार सहयोग किया।
भोजन व्यवस्था, आवास, स्वागत, मंच संचालन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आयोजन समिति की कार्यशैली की सभी ने सराहना की। ग्रामीणों ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत कर समाज की परंपरागत अतिथि सत्कार संस्कृति का परिचय दिया।
महिलाओं एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में महिलाओं एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। महिला प्रभाग की सदस्याओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं सामाजिक चर्चा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं युवा प्रभाग के सदस्यों ने कार्यक्रम संचालन, व्यवस्था एवं समाज जागरूकता अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
युवाओं ने समाज की एकता एवं विकास के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि समाज की संस्कृति एवं परंपरा को आगे बढ़ाना युवाओं की जिम्मेदारी है और इसके लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे।
समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प
सम्मेलन के समापन अवसर पर समाज प्रमुखों एवं आयोजन समिति द्वारा समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की उन्नति के लिए शिक्षा, संगठन एवं सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे सम्मेलन एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि समाज के लोगों के बीच संवाद एवं सहयोग की भावना बनी रहे।
आभार एवं शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों, समाजजनों, ग्रामवासियों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। समाज के लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए इस आयोजन को ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर समाज के सभी लोगों में उत्साह एवं खुशी का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।
यह दो दिवसीय आयोजन समाज की संस्कृति, परंपरा, धार्मिक आस्था एवं सामाजिक एकता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम ने समाज को संगठित होकर शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक जागरूकता एवं विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
जय सेवा, प्रकृति सेवा।
आप सभी के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आभार एवं साधुवाद।
अजय कुमार राठिया
चुईया बालको, कोरबा
छत्तीसगढ़ राठिया कंवर विकासशील समाज
मीडिया प्रभारी, सामाजिक संगठन RKVS
मो. 9993082235 का संदेश दिया।
जय सेवा, प्रकृति सेवा।
आप सभी के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आभार एवं साधुवाद।
अजय कुमार राठिया
चुईया बालको, कोरबा
छत्तीसगढ़ राठिया कंवर विकासशील समाज
मीडिया प्रभारी, सामाजिक संगठन RKVS
मो. 9993082235
Author: Shambhoo Dwip
जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें










