चरचा कालरी में जयपाल सिंह मुंडा जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

चरचा कालरी में जयपाल सिंह मुंडा जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

आदिवासी अस्मिता के महानायक को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, वक्ताओं ने उनके विचारों पर चलने का लिया संकल्प


चरचा (बैकुंठपुर), कोरिया | 20 मार्च 2026 (शुक्रवार)

सिस्टा कार्यालय, नेपाल गेट पूर्वी चरचा कालरी, बैकुंठपुर (जिला कोरिया, छत्तीसगढ़) में आज महान आदिवासी नेता, प्रखर चिंतक, संविधान सभा के सदस्य एवं भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान जी की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के समाजसेवियों, कर्मचारियों एवं आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन कोल इंडिया एस.सी./एस.टी. एम्पलाइज एसोसिएशन (सिस्टा) कार्यालय में किया गया, जहां उपस्थित लोगों ने एक स्वर में “जय सेवा, जय जोहार” के उद्घोष के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।

इस श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप से राजेंद्र सिंह पावले, रमेश कुमार अहिरवार, सीताराम पैकरा, सुखराम सांडिल, मंगलेश्वर सिंह, रामाकांत राम, मोहन लाल विषी, गणेश कमरो, गणेश प्रसाद सिंह टेकाम एवं राकेश सांडिल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर जयपाल सिंह मुंडा जी के योगदान को याद किया और उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।


कार्यक्रम का विस्तृत विवरण

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं जयपाल सिंह मुंडा जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात वक्ताओं ने क्रमवार अपने विचार व्यक्त किए।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा जी का जीवन संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने न केवल आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाई, बल्कि देश के संविधान निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


उद्बोधन: आदिवासी अस्मिता के प्रतीक

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने अपने जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की—चाहे वह शिक्षा हो, राजनीति हो या खेल का क्षेत्र।

वक्ताओं ने बताया कि वे संविधान सभा के सदस्य के रूप में आदिवासी समाज की आवाज बनकर उभरे और उन्होंने आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से अपने विचार रखे। उनके भाषण आज भी प्रेरणास्रोत माने जाते हैं।


संविधान निर्माण में ऐतिहासिक योगदान

सभा में यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि जयपाल सिंह मुंडा जी ने भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संविधान सभा में अपने भाषणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज की पहचान और संस्कृति को संरक्षित करना राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक है।

उनका यह दृष्टिकोण आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जब समाज में समानता, न्याय और अधिकारों की बात होती है।


खेल जगत में भी अमिट छाप

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने उनके खेल जीवन पर भी प्रकाश डाला। बताया गया कि जयपाल सिंह मुंडा जी भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे और 1928 के ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण है कि उन्होंने शिक्षा, राजनीति और खेल—तीनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त की।


समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश

सभा में वक्ताओं ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जयपाल सिंह मुंडा जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि—

  • शिक्षा ही विकास का सबसे बड़ा माध्यम है
  • एकता में शक्ति है
  • अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है
  • संघर्ष से ही सफलता प्राप्त होती है

उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को उनके विचारों की सबसे अधिक आवश्यकता है।


उपस्थित जनों ने लिया संकल्प

इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि—

  • वे समाज की एकता और पहचान को मजबूत करेंगे
  • शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा देंगे
  • समाज के अधिकारों के लिए सदैव सजग रहेंगे
  • युवा पीढ़ी को जागरूक और संगठित करेंगे

सामाजिक एकता पर विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज समाज में एकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित रहेगा, तो कोई भी शक्ति उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

जयपाल सिंह मुंडा जी के विचारों को अपनाकर समाज को नई दिशा दी जा सकती है।


आयोजन का महत्व

यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक जागरूकता अभियान के रूप में भी देखा गया, जिसमें समाज के लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया गया।

सिस्टा कार्यालय द्वारा इस तरह के आयोजनों के माध्यम से समाज को एकजुट करने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है।


निष्कर्ष

अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पुनः जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम “जय सेवा, जय जोहार” के उद्घोष के साथ संपन्न हुआ।

 

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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