“धरती आबा की गूंज से गुंजायमान हुआ शिवनंदनपुर — बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासी समाज का ऐतिहासिक आयोजन”

📌 नगर पंचायत शिवनंदनपुर : बिरसा मुंडा वार्ड में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पहली बार भव्यता के साथ मनाई गई

 

— जय सेवा समिति शिवनंदनपुर के नेतृत्व में ऐतिहासिक आयोजन, MESA कानून व आदिवासी अधिकारों पर उठी गंभीर आवाज —

 

सूरजपुर – शिवनंदनपुर।,

नगर पंचायत शिवनंदनपुर के भगवान बिरसा मुंडा वार्ड में आज धरती आबा क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती पहली बार अत्यंत भव्य, गरिमामयी और एकजुटता के साथ मनाई गई।

इस ऐतिहासिक आयोजन का सफल मंच संचालन राकेश सांडिल, अध्यक्ष—जय सेवा समिति शिवनंदनपुर, ने किया।

⭐ आदिवासी परंपरा के साथ शुरुआत : फूल, हल्दी, चावल एवं तिलक से नमन

“बिरसा मुंडा जयंती पर कोरबा की दहाड़ — सत्ता से लेकर समाज तक हर ओर हलचल!”

कार्यक्रम की शुरुआत बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर फूल, हल्दी, चावल और परंपरागत तिलक अर्पित कर की गई।

समूचा वातावरण गूंज उठा— “अबुआ राज – अबुआ डिशुम!”

“जल–जंगल–जमीन!”

“जल–जंगल–जमीन बचाय बर गोंडवाना भवन सुरजपुर मं गूंजिस बिरसा के गाथा”

धार्मिक, सांस्कृतिक और परंपरागत तरीके से समाजजन ने धरती आबा को नमन किया।

⭐ मुख्य अतिथि सोमनाथ राम नागेश का प्रेरक संबोधन

मुख्य अतिथि सोमनाथ राम नागेश ने भावपूर्ण उद्बोधन देते हुए कहा—

> “शिवनंदनपुर में आदिवासी समाज के साथ पहली बार बिरसा मुंडा जयंती मनाने का अवसर अत्यंत गौरव का विषय है। बिरसा मुंडा ने जल–जंगल–जमीन की रक्षा के लिए जो क्रांति छेड़ी, उसी संघर्ष ने आदिवासी समाज को पहचान, सम्मान और अस्तित्व दिया। यदि उनके त्याग न होते तो आज हमारी भूमि और संस्कृति दोनों खतरे में पड़ चुकी होती।”

उन्होंने आगे घोषणा की कि आने वाले समय में

बच्चों की डांस प्रतियोगिता, मेहंदी प्रतियोगिता और खेलकूद कार्यक्रम को भी शामिल किया जाएगा।

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⭐ उलगुलान आंदोलन का उल्लेख — इतिहास की क्रांति जिसने आदिवासी चेतना जगाई

“जल–जंगल–जमीन बचाय बर गोंडवाना भवन सुरजपुर मं गूंजिस बिरसा के गाथा”

कार्यक्रम में बिरसा मुंडा द्वारा 1899–1900 में चलाए गए

उलगुलान (महासंग्राम) का विस्तृत उल्लेख किया गया।

यह वह लड़ाई थी जिसने जमीन की लूट, शोषण और अत्याचार के खिलाफ देशभर में नई चेतना जगाई।

और इसी कारण आज 15 नवंबर पूरे भारत में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

⭐ MESA कानून और नगर पंचायत मुद्दा कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बना

 

कार्यक्रम के दौरान राकेश सांडिल – प्रदेश अध्यक्ष, शंभू शक्ती सेना छत्तीसगढ़ ने वर्तमान परिस्थितियों पर गंभीर मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा—

 

> “शिवनंदनपुर पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र है। यहां किसी भी नगर पंचायत को लागू करने से पहले MESA (Municipal Extension to Scheduled Areas) कानून का पालन अनिवार्य है।

MESA और PESA दोनों स्पष्ट कहते हैं कि अनुसूचित क्षेत्रों में शहरी निकाय गठन के लिए ग्राम सभा की अनुमति, परामर्श और अधिकार संरक्षण अनिवार्य है।”

उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा—

 

> “बिना MESA लागू किए नगर पंचायत बनाने से आदिवासी समाज पर अधिक टैक्स का बोझ बढ़ेगा, संविधानिक अधिकार कमजोर होंगे और जल–जंगल–जमीन पर नियंत्रण कम होगा। इसलिए सरकार यदि नगर पंचायत लागू कर रही है तो पहले MESA कानून को धरातल पर लागू करे।”

✔ सिटी डेवलपमेंट प्लान पर भी उठी गंभीर आपत्ति

 

राकेश सांडिल ने बताया—

> “हाल ही में जो नगर पंचायत का सिटी डेवलपमेंट प्लान मुख्यमंत्री को भेजा गया है, उसमें एक भी आदिवासी धरोहर—

शहीद वीर नारायण सिंह चौक, बिरसा मुंडा चौक, सरना स्थल या किसी ऐतिहासिक स्थान को शामिल नहीं किया गया है।

यह स्पष्ट उपेक्षा है और कहना गलत नहीं होगा कि हम राजनीतिक शिकार बन रहे हैं।”

 

 

 

⭐ पूर्व सरपंच एवं संरक्षक मंठु राम सांडिल का सारगर्भित भाषण

 

उन्होंने कहा—

 

> “आज का दिन हम सबके लिए गर्व का दिन है। धरती आबा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ और उनकी क्रांति ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज कभी अन्याय सहन नहीं करेगा।

इस वार्ड का नाम ‘भगवान बिरसा मुंडा वार्ड’ कराने के लिए हम सबने संघर्ष किया और आज यह हमारा गौरव है। भविष्य में यहां ‘बिरसा मुंडा चौक’ भी बनाया जाएगा।”

 

 

 

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया—

 

> “अपने इतिहास, संस्कृति और महापुरुषों को जानो, तभी समाज प्रगति कर पाएगा।”

 

 

 

⭐ राकेश सांडिल का विशेष संबोधन : “भूमि बचेगी तभी आदिवासी बचेगा”

 

राकेश सांडिल ने कहा—

 

> “धरती आबा कहते थे— जब तक भूमि नहीं बचेगी, तब तक मानव समाज और आदिवासी समाज नहीं बचेगा।

इसलिए उनकी लड़ाई सिर्फ अंग्रेजों से नहीं बल्कि जल–जंगल–जमीन पर कब्जे के खिलाफ थी।”

 

 

 

उन्होंने यह भी जोड़ा—

 

> “आज पूरा विश्व पर्यावरण संतुलन की चिंता कर रहा है, पर आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति संरक्षण का पहरेदार रहा है।

यही कारण है कि हसदेव और जंगल बचाओ आंदोलनों में सबसे आगे आदिवासी समाज लड़ रहा है।”

 

 

⭐ अन्य वक्ताओं ने भी रखे अपने विचार

कार्यक्रम में

शंभू सिंह उईके, प्रीति उईके, जोखुराम उईके

सहित कई समाजजनों ने अपने उद्बोधन में

बिरसा मुंडा के संघर्ष, आदिवासी इतिहास और सांस्कृतिक चेतना पर बल दिया।

 

 

⭐ विशेष उपस्थिति

सोमनाथ राम नागेश — मुख्य अतिथि

राकेश सांडिल — प्रदेश अध्यक्ष, शंभू शक्ती सेना / अध्यक्ष, जय सेवा समिति

संरक्षक जीवन उईके, मंठु राम सांडिल — पूर्व सरपंच एवं संरक्षक

देशु नेताम, धनश्याम पावले,अमरजीत सांडिल, अंशु सिंह मराबी

दीपक सिंह नेताम,जोखुराम सांडिल, शंभू सिंह उईके

आशिष सिंह, मान सिंह उईके, प्रीति उईके

राखी सांडिल उईके, दीपिका सिंह, भुनेश्वरी सिंह,

आरूंदी पोया, रितिक सिंह पावले, सुनिल सिंह नेताम

कमल सिंह पावले, शुभम सिंह उईके ,रोशन सिंह उईके

 

 

 

समापन : संकल्प, स्वाभिमान और एकजुटता का संदेश

 

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि—

 

“भगवान बिरसा मुंडा की जयंती हर वर्ष और भी बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी।”

 

पूरे क्षेत्र में गूंज उठा—

“अबुआ राज – अबुआ डिशुम!”

“जल–जंगल–जमीन हमारा अधिकार!”

 

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें

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