शिवनंदनपुर में करमा पर्व पर उमड़ा जनसैलाब
जय सेवा समिति ने दिखाई एकता और प्रकृति संरक्षण की मिसाल
शिवनंदनपुर।
नगर पंचायत शिवनंदनपुर में पारंपरिक महापर्व करमा का आयोजन इस वर्ष भी हर्षोल्लास और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। जय सेवा समिति, शिवनंदनपुर द्वारा लगातार दूसरे वर्ष किए गए इस आयोजन ने गाँव में एकता, भाईचारे और प्रकृति रक्षा का अद्भुत संदेश दिया। इस दौरान हजारों की भीड़ उमड़ी और लोगों ने सामूहिक रूप से प्रार्थना में हिस्सा लिया।
🌿 अर्जी-विनती और प्रकृति संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम की शुरुआत “हे करम पेनता अर्जी-विनती” से हुई। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि खेत-खलिहान अन्न से भरे रहें, जंगलों की हरियाली बनी रहे, नदियाँ अमृत की तरह बहती रहें और परिवारों में सुख-शांति कायम हो। लोगों ने यह भी प्रण लिया कि वे प्रकृति को प्रदूषित नहीं करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-जंगल-जमीन को सुरक्षित रखेंगे।

🌾 करमा कहानी का वाचन
समारोह में समिति के संरक्षक श्री मंठूराम सांडिल ने करमा कहानी का वाचन किया। उन्होंने बताया कि करमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय पर्व है, जो आपसी भाईचारे और सम्मान का संदेश देता है।

👕 पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक झलक
महिलाओं ने साड़ी और पुरुषों ने धोती पहनकर अपने सांस्कृतिक स्वरूप को जीवंत किया। मांदर और ढोल-नगाड़ों की गूंज पर लोकगीत गाए गए और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियाँ हुईं। इसने पूरे वातावरण को आनंदमय और ऊर्जावान बना दिया।
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🍲 भंडारा और उपवास परंपरा
अनुष्ठान के उपरांत सामूहिक भोज का आयोजन हुआ। उपवास रखने वालों ने फल-फूल और प्रसाद ग्रहण कर करमा पेनता से आशीर्वाद मांगा। भंडारे में हर उम्र और हर वर्ग के लोग सम्मिलित हुए, जिससे समाज में समरसता और भाईचारे का संदेश फैला।
🌳 समिति की अपील और आभार
जय सेवा समिति, शिवनंदनपुर ने अपील की कि करमा पर्व का वास्तविक संदेश – प्रकृति की रक्षा और समाज में एकता – हर गाँव और हर व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। समिति अध्यक्ष राकेश सांडिल ने कहा – 
“हमारा पहला करम और कर्तव्य जल-जंगल-जमीन की रक्षा करना है। जब तक जीवन है, प्रकृति की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म रहेगा।”

उन्होंने सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी ग्रामीणों और सहयोगियों का आभार जताया।

👥 विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर समिति के संरक्षक एवं सदस्य जीवन उईक, शेष राम सांडिल, मान सिंह उईके, शंभु उईके, सुन्दर साय सांडिल, संजू सांडिल, जोधन, ज्योत नेताम, अशोक अर्मो, सुरेश बखला, मंगल मरावी, जोखू सांडिल कृष्णा सांडिल, मुनेन्द्र सांडिल, बबीता अर्मो निरा सरूता , सीमा राजवाड़े, राखी उईके, हल्कनिया यादव, विनेश्वरी सांडिल , प्रीति उईके, सविता यादव, विफईया एवं सैकड़ों कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।

निष्कर्ष
शिवनंदनपुर का करमा पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर एक सामाजिक आंदोलन और पर्यावरण दिवस जैसा प्रतीक बनकर सामने आया, जिसने यह संदेश दिया कि एकता और प्रकृति प्रेम ही जीवन का आधार है।
Author: Shambhoo Dwip
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