📰 सनसनीखेज हेडलाइन:
“आदिवासी युवाओं ने थामा डिजिटल कलम — अब अपनी कहानी खुद कहेंगे सोशल मीडिया पर!”
📍 स्थान: गोंडवाना भवन, नमदगिरी रिंग रोड, सूरजपुर
📅 तारीख: 13 नवंबर 2025
🌿 आदिवासी युवाओं में जागी डिजिटल क्रांति की चेतना!
सूरजपुर। “अब कोई हमारी कहानी नहीं लिखेगा — हम खुद अपनी आवाज़ बनेंगे”। यही संदेश गूंजा गोंडवाना भवन, नमदगिरी रिंग रोड में आयोजित पांच दिवसीय “आदिवासी युवा सोशल मीडिया क्रिएटर, आत्मरक्षा, संवैधानिक जागरूकता एवं कैरियर मार्गदर्शन गोटूल आवासीय प्रशिक्षण शिविर” के दूसरे दिन।
इस विशेष शिविर में प्रदेशभर के आदिवासी युवा न केवल डिजिटल तकनीक सीख रहे हैं, बल्कि यह भी समझ रहे हैं कि कैसे अपनी परंपरा, भाषा और संस्कृति को सोशल मीडिया के माध्यम से विश्व तक पहुंचाया जा सकता है।
🧘♂️ योग से दिन की शुरुआत, आत्मरक्षा से आत्मविश्वास की ओर
दूसरे दिन की शुरुआत विजय ठाकुर के योग एवं मेडिटेशन सत्र से हुई।
उन्होंने कहा — “जिस युवा के भीतर आत्मअनुशासन है, वही समाज का सच्चा नेता बन सकता है।”
इसके बाद कुमार गौरव और खुशबू कुमारी ने आत्मरक्षा प्रशिक्षण में युवाओं को कराटे की तकनीकें — अपर पंच, लोअर पंच और मिडिल पंच — सिखाईं।
इस सत्र ने खासकर बालिकाओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना को और प्रबल किया।
🎥 “अपनी कहानी खुद बताने की कला” — सोशल मीडिया क्रिएटर वर्कशॉप
मुख्य सत्र का संचालन किया तुमलेश नेटी (डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, सोशल मीडिया ट्रेनर एवं NYCC Climate Champion 2025, गरियाबंद) और नीलिमा सोरी (लेखिका एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, उत्तर बस्तर कांकेर) ने।
दोनों ने युवाओं को कंटेंट क्रिएशन की बारीकियां सिखाईं —
कैसे एक साधारण वीडियो भी सशक्त संदेश बन सकता है।
उन्होंने A Roll और B Roll, फ्रेमिंग, एंगल, लाइटिंग और बैकग्राउंड के महत्व पर गहराई से चर्चा की।
सत्र में युवाओं को यह भी बताया गया कि थंबनेल, कलर कोड और कैप्शन किसी भी पोस्ट को भीड़ में अलग पहचान दिलाने की कुंजी हैं।
🌾 गोंडी भाषा के सोशल मीडिया हीरो “Gondi Teacher नेताम” बने प्रेरणा स्रोत
विशेष सत्र “मेरी कहानी” में कोण्डागांव से आए अभिचंद नेताम, जिन्हें सोशल मीडिया पर “Gondi Teacher नेताम” के नाम से जाना जाता है, ने अपनी संघर्ष और सफलता की यात्रा साझा की।
उन्होंने बताया कि उन्होंने बिना किसी बड़े साधन के, केवल एक साधारण मोबाइल से शुरुआत की थी —
और आज 35,000 से अधिक लोग सोशल मीडिया पर उनसे गोंडी भाषा सीख रहे हैं।
उन्होंने कहा —
“अगर हम अपनी भाषा भूल जाएंगे, तो अपनी पहचान भी खो देंगे।
इसलिए हमें अपनी भाषा, गीत और परंपराओं को डिजिटल दुनिया में अमर बनाना होगा।”
💬 आयोजकों ने बताया — यह सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, एक सामाजिक आंदोलन है
कार्यक्रम के संयोजक बी.पी.एस. पोया, जिला अध्यक्ष (सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, सूरजपुर) ने कहा —
“यह शिविर युवाओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व और रचनात्मकता की नई दिशा देता है।
अब हमारे युवा केवल सोशल मीडिया के दर्शक नहीं, बल्कि निर्माता बनेंगे।”
युवा प्रभाग सचिव मेहरनोश बड़ा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अंग्रेजी भाषा के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।
🌍 छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से पहुंचे युवा
शिविर में सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सोनहत और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों से सैकड़ों युवा शामिल हुए।
दूसरे दिन पूरे परिसर में ऊर्जा, उत्साह और सीखने की ललक स्पष्ट दिखाई दी।
🪶 सारांश:
यह प्रशिक्षण शिविर सिर्फ तकनीकी ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी युवाओं के भीतर “अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिकता को अपनाने” का एक जनांदोलन बनता जा रहा है।
डिजिटल क्रिएटिविटी और सांस्कृतिक पहचान के इस संगम से निश्चित ही एक नई सामाजिक चेतना का जन्म हो रहा है।
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Author: Shambhoo Dwip
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