ग्राम पंचायत शिवनंदनपुर में जय सेवा समिति की मासिक बैठक संपन्न — समाजिक चेतना, संगठन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर दिया गया जोर
शिवनंदनपुर।
आज ग्राम पंचायत शिवनंदनपुर में जय सेवा समिति शिवनंदनपुर की मासिक बैठक संपन्न हुई, जिसमें कोयतुर संदेश पत्रिका के संपादक अजय पोर्ते विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में समाज की वर्तमान स्थिति, सांस्कृतिक पहचान, संगठन की आवश्यकता और विचारधारा की एकजुटता पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
अजय पोर्ते ने कही महत्वपूर्ण बातें —
“हम अपनी ही भूमि पर अलग-अलग विचारधाराओं में बँटकर जी रहे हैं”

अजय पोर्ते ने पत्रिका के उद्देश्य और उसके महत्व को विस्तार से रखते हुए कहा कि—
आज मूल निवासी समाज अपने ही क्षेत्र में अलग-अलग विचारधाराओं में बंट चुका है, जिसके कारण बाहरी लोग हमसे ही आर्थिक लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी पारंपरिक रूढ़ि, प्रथाओं और प्राकृतिक नियमों को नहीं समझेंगे, जिन्हें हमारे पुरखों ने सिखाया है, तब तक हम अपने समाज की वास्तविक शक्ति को नहीं पहचान पाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि —
– रजवार, तेली, कलार, पनिका एवं सभी एसटी, एससी, ओबीसी समुदाय यदि एकजुट हों तो कई सामाजिक कमियों को समाप्त किया जा सकता है।
– कोयतुर संदेश पत्रिका हर महीने नई विचारधारा, समाज का इतिहास, पुरखों की परंपराएं और महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकारों को सामने लाएगी।
– आज हमारे पास अपनी विचारधारा की कोई बड़ी पुस्तक या अखबार नहीं है। इसलिए यह पत्रिका मूल निवासी समाज के लिए एक दर्पण का काम करेगी।
– अजय पोर्ते ने यह भी कहा कि पत्रिका से जुड़े लोगों को सम्मान के साथ-साथ अच्छी आमदनी भी सुनिश्चित होगी।
राकेश सांडिल का संबोधन —

“अपनी पहचान जाने बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता”**
बैठक को संबोधित करते हुए राकेश सांडिल ने कहा कि समाज से विशेष आग्रह है कि वे इस पत्रिका को पढ़ने के साथ-साथ अपने घरों, परिवारों और युवाओं में इसे बढ़ावा दें। उन्होंने कहा —
– आज शिवनंदनपुर में रजवार, तेली, कलार, पनिका समाज के लोग हैं, लेकिन अधिकांश को अपने इतिहास का ज्ञान नहीं है।
– इतिहास की जानकारी ना होने के कारण समाज आदिवासी समुदाय से दूर होता जा रहा है और विभिन्न श्रेणियों — आदिवासी, ओबीसी, जनरल — में बाँटा जा रहा है।
– “राजनीति के इस चक्रव्यूह को समझने की जरूरत है,” उन्होंने कहा।
– गोंड समाज को छोड़ दें तो बाकी समाज में सामाजिक क्रांति शून्य है।
– जब तक सामाजिक चेतना जागृत नहीं होगी, तब तक कोई भी समुदाय राजनीतिक, आर्थिक या शैक्षणिक क्षेत्रों में मजबूती प्राप्त नहीं कर सकता।
उन्होंने पत्रिका को अपनाने को सामाजिक एकता की दिशा में एक मजबूत कदम बताया और कहा कि मूल निवासी समाज यदि एकजुट हो जाए तो परिवर्तन निश्चित है।
पूर्व सरपंच मंठु राम सांडिल ने कहा —
“गोंडवाना गोंड महासभा गांव-गांव में संगठन को मजबूत कर रही है”
पूर्व सरपंच मंठु राम सांडिल ने बताया कि वे हाल ही में गोंडवाना गोंड महासभा जिला सूरजपुर की बैठक में शामिल हुए। संगठन का उद्देश्य गांव स्तर तक सामाजिक एकता को मज़बूत करना है। उन्होंने कहा —
– शिवनंदनपुर क्षेत्र के 17 गांवों में बैठक कर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।
– समाज में जन्म, विवाह, मृत्यु सहित अन्य सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए भी पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
– इससे समाज में व्यवस्था, अनुशासन और परंपराओं का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
उपस्थित सदस्य
बैठक में जीवन उईके, शेषराम सांडिल, जोखू सांडिल, शंभू उईके, प्रीति उईके, खेलावन उईके ,दखिना, जोयत नेताम, अमरदविन सरूता, महेंद्र नेताम गोगो, ईश्वर मरावी, सोमार साय सांडिल, संजू सांडिल, मनोहर राजवाड़े, विजय पोया, बब्लू पावले, सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
शिवनंदनपुर में हुई यह बैठक सामाजिक जागरूकता, इतिहास पुनरुद्धार, संगठन निर्माण और सांस्कृतिक एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। कोयतुर संदेश पत्रिका मूल निवासी समाज की विचारधारा, संस्कृति और इतिहास को मजबूत करने में एक नई क्रांति का रूप ले सकती है।
Author: Shambhoo Dwip
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