🎓 उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में दीपावली अवकाश संशोधन की मांग — आर. एन. ध्रुव ने मंत्रियों को लिखा पत्र
रायपुर, 6 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में घोषित दीपावली अवकाश को लेकर संशोधन की मांग उठी है।
वर्तमान में विभाग द्वारा 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2025 तक दीपावली अवकाश घोषित किया गया है। किंतु इस अवधि में गोवर्धन पूजा (22 अक्टूबर) एवं भाई दूज (23 अक्टूबर) जैसे प्रमुख पर्व शामिल नहीं हैं।
हिंदू समाज के लिए ये दोनों पर्व दीपावली के तुरंत बाद आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण पारिवारिक एवं धार्मिक उत्सव हैं। अवकाश की अवधि में इनका समावेश न होने के कारण शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शैक्षणिक स्टाफ एवं छात्र–छात्राओं को अलग से छुट्टी लेनी पड़ेगी, जिससे शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।
📄 संघ ने रखा प्रस्ताव
इस विषय पर अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष आर. एन. ध्रुव ने राज्य सरकार के संबंधित मंत्रियों एवं कुलसचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि —
“दीपावली अवकाश की तिथि में संशोधन करते हुए दिनांक 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक (कुल 6 दिन) किया जाए तथा शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर से 27 दिसंबर तक रखा जाए।”
🏛️ पत्र भेजे गए संबंधित अधिकारियों को
आर. एन. ध्रुव ने यह निवेदन पत्र निम्नलिखित वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजा है —
- माननीय श्री टंकराम वर्मा, मंत्री – राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।
- माननीय श्री खुशवंत साहेब, मंत्री – तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।
- कुलसचिव, छत्तीसगढ़ विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई।
उन्होंने कहा कि यह मांग शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों के हित में है, ताकि वे सभी दीपावली के संपूर्ण पर्वों को पारिवारिक एवं धार्मिक रूप से मनाने में सक्षम हों।
🕯️ स्कूल शिक्षा विभाग में पहले से विस्तारित अवकाश
यह भी उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा विभाग में दीपावली अवकाश 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2025 तक घोषित है।
इसलिए उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में भी समान तिथि का अवकाश रखने से शैक्षणिक संतुलन बना रहेगा और एकरूपता कायम रहेगी।
🔎 निष्कर्ष
आर. एन. ध्रुव का यह प्रयास उच्च शिक्षा प्रणाली में त्योहारों के अनुरूप लचीलापन और सांस्कृतिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है।
Author: Shambhoo Dwip
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