🌄 लद्दाख आंदोलन को मिला आदिवासी समाज का समर्थन
सोनम वांगचुक की रिहाई और छठवीं अनुसूची लागू करने की मांग तेज
कोरबा, 6 अक्टूबर 2025 | संवाददाता रिपोर्ट
लद्दाख में संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को अब छत्तीसगढ़ के आदिवासी संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की रिहाई और लद्दाख को संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है।

कोरबा में जारी प्रेस विज्ञप्ति में संगठन ने कहा कि लद्दाख की जनता अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार आंदोलन को दबाने के लिए दमनकारी तरीके अपना रही है। संगठन ने कहा कि हाल ही में लद्दाख में हुई हिंसा और चार नागरिकों की मृत्यु की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए।
🔹 एनएसए के तहत कार्रवाई पर नाराजगी
सर्व आदिवासी समाज ने सोनम वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने को अलोकतांत्रिक और दमनकारी कदम बताया। संगठन ने कहा कि “सोनम वांगचुक कोई अपराधी नहीं, बल्कि लद्दाख और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने वाले पर्यावरण सैनिक हैं।”
संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की कि वांगचुक पर लगे सभी झूठे आरोप तुरंत हटाए जाएं और उन्हें जोधपुर जेल से सुरक्षित रूप से लेह वापस भेजा जाए।
🔹 आदिवासी क्षेत्रों के लिए छठवीं अनुसूची की मांग
विज्ञप्ति में कहा गया कि लद्दाख की तरह ही छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा, कोरवा (कोरबा), जशपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों को भी स्वशासी संवैधानिक सुरक्षा की आवश्यकता है।
प्रतिनिधियों ने कहा, “लद्दाख के अधिकांश निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं, जिन्हें संविधान की छठवीं अनुसूची के तहत स्वशासन का अधिकार है। लेकिन केंद्र सरकार कॉर्पोरेट कंपनियों को जमीन और संसाधन सौंपकर स्थानीय लोगों के अस्तित्व से खिलवाड़ कर रही है।”
🔹 भारत बंद की चेतावनी
सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार 12 नवम्बर 2025 तक इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो 15 नवम्बर 2025 (बिरसा मुंडा जयंती) को राष्ट्रव्यापी भारत बंद किया जाएगा।
संगठन ने कहा, “यह आंदोलन संविधान और जनजीवन की रक्षा के लिए है। अगर सरकार नहीं जागी, तो इसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी केंद्र पर होगी।”

🔹 कोरबा में सौंपा गया ज्ञापन
यह ज्ञापन कोरबा कलेक्टर को सौंपा गया। इस दौरान कई प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे —
सेवक राम मरावी (जिला अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज कोरबा),
निर्मल सिंह राज (उपाध्यक्ष, आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा),
रमेश सिरका (उपाध्यक्ष, आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा),
गेंदालाल सिदार, विक्रम सिंह, लव मांझी (प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी, छत्तीसगढ़),
आशीष सिंह मार्को, पुलिस मांझी, प्रवीण पालिया (पूर्व जिला अध्यक्ष, शंभू शक्ती सेना कोरबा),
धर्मेंद्र ध्रुव (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, शंभू शक्ती सेना छत्तीसगढ़)।
🔹 जनता की आवाज को दबाना बंद करे सरकार
संगठन ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है। पर्यावरण, रोजगार, और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी लद्दाख की आवाज को दबाने का प्रयास देश की एकता और संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।
“हम लद्दाख के लोगों के साथ हैं, सोनम वांगचुक की आवाज हमारी आवाज है। संविधान और प्रकृति की रक्षा में अब आदिवासी समाज भी सड़क पर उतरेगा।”
— सेवक राम मरावी, जिला अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज कोरबा
Author: Shambhoo Dwip
जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें











