**शीर्षक:**
*सांस्कृतिक आयोजन के साथ चार दिनों की सीख और परिवर्तन की शुरुआत*
एक शानदार समारोह में, पेन थाना में 9वां कोया पुनेम राष्ट्रीय आदिवासी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाज़ और “गोंगो” और “दुलरवा सांस्कृतिक रेला-पाटा” के गोंगोवाचन से शुरुआत हुई।

**मुख्य बिंदु:**
– छत्तीसगढ़ के पांच क्षेत्रों सहित सरगुजा, बस्तर, बिलासपुर, दुर्ग, और रायपुर से प्रशिक्षणार्थी भाग लेने पहुंचे।
– प्रारंभिक दिन में “रेला-पाटा” धुन के साथ संगीतमय स्वागत हुआ, जो एकजुटता और सांस्कृतिक समृद्धि की प्रतीक है।
– “आर्थिक गण्डव्यवस्था” के संस्थापक डॉ. नारवेन कासव टेकाम ने अनुभवी प्रशिक्षकों की शिक्षाओं के महत्व पर जोर दिया।
– उपस्थितों से यह कहा गया कि वे अपने परिवार और समाज पर इस प्रशिक्षण के प्रभाव को विचार करें।
– डॉ. टेकाम ने प्रशिक्षण से उपयुक्त बदलाव लाने और तर्कशक्ति को सुधारने की गारंटी दी।
**उद्धारणीय उक्ति:**
*”मैं दावा करता हूँ कि ये चार दिन का प्रशिक्षण आपके जीवन में गहरा परिवर्तन लाएगा। तर्क की शक्ति को बढ़ावा मिलेगा, जो एक दिशा-भरा जीवन की ओर ले जाएगा।” – डॉ. नारवेन कासव टेकाम*

**समापन टिप्पणी:**
यह घटना व्यक्तिगत विकास में तर्कशक्ति के महत्व को हाइलाइट करती है और समाज में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने में इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के कार्यशालाओं की भूमिका को बल देती है।
Author: Shambhoo Dwip
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