दीपका खदान के 55 MTPA विस्तार पर विरोध तेज, कोरबा को आपदा की चेतावनी
— प्रकाश कोर्राम
कोरबा, छत्तीसगढ़।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका ओपन कास्ट कोयला खदान की वार्षिक उत्पादन क्षमता को मौजूदा 40 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 55 MTPA करने के प्रस्ताव को लेकर कोरबा जिले में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष प्रकाश कोर्राम ने इस प्रस्ताव को “कोरबा को पर्यावरणीय और सामाजिक आपदा की ओर धकेलने वाला निर्णय” करार दिया है।
प्रकाश कोर्राम ने कहा कि जब मौजूदा 40 MTPA उत्पादन ने ही दीपका–कोरबा क्षेत्र को गंभीर प्रदूषण, जल संकट और सामाजिक असुरक्षा की स्थिति में पहुँचा दिया है, तब 55 MTPA का विस्तार किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विस्तार स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, जल-संसाधनों, कृषि, आजीविका और सुरक्षा पर विनाशकारी प्रभाव डालेगा।
उन्होंने बताया कि खदान क्षेत्र में कोयले की महीन धूल, राख और लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण वायु और ध्वनि प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है। श्वसन रोग, दमा, आँखों और त्वचा की बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं ब्लास्टिंग से घरों में दरारें पड़ रही हैं और लोग मानसिक भय में जीने को मजबूर हैं।
भूजल स्तर में लगातार गिरावट और खदान के दूषित पानी के नदी-नालों में मिलने से कृषि भूमि बंजर होती जा रही है। किसानों को सिंचाई और पेयजल दोनों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इसके साथ ही अंधाधुंध वृक्ष कटाई से पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रकाश कोर्राम ने विशेष रूप से ड्रेनेज एरिया और लीलागर नदी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब तक इन पर कोई समग्र, वैज्ञानिक और पारदर्शी अध्ययन नहीं किया गया है। पूर्व में भारी वर्षा के दौरान लीलागर नदी का प्रवाह बदलकर खदान में घुस जाने की घटना एक बड़ी चेतावनी थी, लेकिन उससे सबक लेने के बजाय और बड़े विस्तार की तैयारी की जा रही है।
कोयला परिवहन, साइलो, सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट), रेलवे साइडिंग और भारी वाहनों के पार्किंग यार्ड को उन्होंने “चलते-फिरते प्रदूषण स्रोत” बताया। उनका कहना है कि सड़क मार्ग से कोयला परिवहन, जर्जर सड़कों से उड़ती कोल डस्ट, खराब वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम और 24×7 शोर ने आसपास के गाँवों में सामान्य जीवन असंभव बना दिया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत अनिवार्य सेफ्टी ज़ोन का अब तक निर्माण नहीं किया गया है, जो पर्यावरणीय शर्तों का सीधा उल्लंघन है। खुले में और अव्यवस्थित तरीके से रखे गए कोयला ढेरों से लगातार धूल उड़ रही है, आग लगने और जहरीली गैसों के उत्सर्जन का खतरा बना रहता है, जिससे श्रमिकों और स्थानीय निवासियों का स्वास्थ्य गंभीर जोखिम में है।
प्रकाश कोर्राम ने मांग की कि 55 MTPA विस्तार पर किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले मौजूदा 40 MTPA खदान का स्वतंत्र और निष्पक्ष सामाजिक एवं पर्यावरणीय ऑडिट कराया जाए। ड्रेनेज एरिया और लीलागर नदी पर प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन, प्रभावित ग्राम सभाओं की वास्तविक और सूचित सहमति, लंबित रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास, सेफ्टी ज़ोन और परिवहन सुधार जैसे मुद्दों पर पहले कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पूर्व में कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में 55 MTPA विस्तार को मंजूरी देना पर्यावरण संरक्षण कानूनों की भावना के खिलाफ और स्थानीय समाज के जीवन के अधिकार का उल्लंघन होगा।
अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह विस्तार स्थानीय लोगों की सहमति और वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी कर आगे बढ़ाया गया, तो यह कोरबा जिले के वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए विनाशकारी साबित होगा।
Author: Shambhoo Dwip
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