**तिथि:** 03/11/2024
**स्थान:** ग्राम डुमरमुडा (बागों)
ग्राम डुमरमुडा में बुढ़ालपेन सेवा गोंगों स्थापना दिवस के अवसर पर एक दिवसीय संवैधानिक/गोंडी पूनेम कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा के संस्थापक रघुवीर सिंह मार्को, गणेश मरपच्ची, सरजू सरोटिया, और जय सिंह मरावी जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया।
### कार्यशाला का उद्देश्य
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करना और नशा मुक्ति के लिए जागरूकता फैलाना था। इसमें गोंड/आदिवासी समाज की उत्पत्ति, उनके इतिहास और सामाजिक व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।
### प्रमुख बातें
रघुवीर सिंह मार्को जी का संबोधन
मार्को जी ने प्रशिक्षण में बताया कि गोंड/आदिवासी समाज की उत्पत्ति अमूरकोट की धरती से हुई, और उनकी वंश की विस्तृति नर्मदा से सिंधु नदी तक फैली। उन्होंने बताया कि सिंधु घाटी की सभ्यता में आज भी आदिवासी समाज के अंश मौजूद हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आर्यों के आक्रमण के बाद गोंडवाना का विस्तार हुआ और इस दौरान आदिवासी समाज की समृद्धि को नुकसान पहुँचा।*शताली शेडमाके का बीबीसी में असिस्टंट प्रोड्यूसर पद पर चयन: आदिवासी समाज की गौरवशाली उपलब्धि**
नशा मुक्ति का संदेश
मारको जी ने नशा और मद्यपान को आदिवासी समाज के लिए एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने शंभू सैनिकों के माध्यम से नशा मुक्ति के लिए शपथ दिलाने का कार्य भी शुरू किया।

#### गणेश मरपच्ची जी का प्रशिक्षण
गणेश मरपच्ची जी ने सल्ला गांगरा शक्ति और कोयतुर गण्ड व्यवस्था पर प्रकाश डाला, जिससे आदिवासी समाज को अपने पारंपरिक अधिकारों और व्यवस्थाओं को समझने में मदद मिली।सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, शंभू शक्ती सेना के द्वारा मुखर विरोध प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन को दोषी तत्वों पर कार्यवाही करते पृथक न्यायिक जांच हो ,
#### सरजू सरोटिया जी की बात
सरजू सरोटिया जी ने पारंपरिक ग्राम सभा की प्रक्रियाओं पर चर्चा की, जिसमें कानून और न्याय की पारंपरिक व्यवस्थाएं शामिल थीं। उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वज किस तरह से सामूहिक निर्णय लेते थे, जिससे आज हमें सीखने की आवश्यकता है।बिश्रामपुर – शंभू शक्ति सेना ने नगर पंचायत के गठन को लेकर जताई आपत्ति, संविधानिक अधिकारों का हवाला**
#### जय सिंह मरावी जी का योगदान
पूर्व डीएसपी जय सिंह मरावी जी ने थाने, यातायात और आबकारी अधिनियमों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी, जिससे समुदाय को कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक किया गया।शंभू शक्ति सेना के तत्वाधान में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ समापन
### उपस्थित लोग
कार्यशाला में शंभू शक्ति सेना के सदस्यों के साथ-साथ गांव के बुजुर्ग और युवा भी उपस्थित थे, जिन्होंने कार्यशाला से काफी सीख ली।
निष्कर्ष
यह कार्यशाला न केवल आदिवासी समाज की पहचान को उजागर करने में सहायक सिद्ध हुई, बल्कि नशा मुक्ति और सामुदायिक संगठनों के महत्व को भी रेखांकित किया। भविष्य में इस तरह के आयोजनों की निरंतरता से आदिवासी समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनः जागरूक करने और संरक्षित करने का अवसर मिलेगा।
राकेश सांडिल ✒️ से
Author: Shambhoo Dwip
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