नशा छोड़ो, शिक्षा अपनाओ , जल जंगल जमीन बचाओ – गढ़ उपरोड़ा में मोहन सिंह प्रधान की गर्जना

 

गढ़ उपरोड़ा (कोरबा)।

9 अगस्त 2025 को सुदूर वनांचल गढ़ उपरोड़ा में शंभू शक्ति सेना के तत्वावधान में विश्व आदिवासी मूल निवासी दिवस बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र में कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, महिला-पुरुष, बच्चे और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पूरे इलाके में इस दिवस को लेकर विशेष उत्साह का माहौल रहा।

🎯 खेल, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कार्यक्रम

कार्यक्रम में रस्साकशी और कबड्डी प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण रहे। पुरुष और महिला वर्ग में अलग-अलग मुकाबले हुए, जिनमें विभिन्न पंचायतों की टीमों ने भाग लिया।

🏆 कबड्डी विजेता:

प्रथम विजेता कबड्डी टीम

प्रथम: जय बुढा देव पांथाः ₹5100 नकद (द्वारा भूपेन्द्र सिंह मरकाम) + शील्ड

द्वितीय: अजगरबहारः ₹3100 नकद + शील्ड

द्वितीय विजेता कब्बड्डी टीम

सांत्वना: कछार टीम: ₹700 नकद

🏆 रस्साकशी (पुरुष वर्ग):

प्रथम: अजगरबहार ₹1500, द्वितीय: ₹750

🏆 रस्साकशी (महिला वर्ग):

प्रथम: रांपा टीम ₹1500 ,

द्वितीय: शंभू शक्ति सेना टीम ₹750

कार्यक्रम के दौरान “ सभी टीमों ” को विशेष सम्मान दिया गया।

इसके अलावा, वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसके पौधे वन विभाग की टीम द्वारा उपलब्ध कराए गए। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और “जल-जंगल-जमीन” की रक्षा का संदेश देना था।

🎤 मुख्य अतिथि का प्रेरक उद्बोधन

 

मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में मोहन सिंह प्रधान, आदिवासी शक्तिपीठ संरक्षक एवं आदिवासी मामलों के संवैधानिक जानकार, उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा —

 

“आदिवासी संस्कृति ही विश्व संस्कृति की जननी है। आदिवासी समाज ने देश और दुनिया को संस्कृति, सभ्यता और जीवन जीने का मार्ग दिया, लेकिन आज इस समाज की स्थिति देखकर दुख होता है।”

उन्होंने याद दिलाया कि आदिवासी समाज ने अंग्रेजों के सामने कभी घुटने नहीं टेके, बल्कि उन्हें अपने क्षेत्रों से खदेड़ा। परंतु आज शासन-सत्ता के चंगुल में फंसकर समाज के कई लोग अंतिम पंक्ति में खड़े हैं।

शिक्षा, नशा-मुक्ति, पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम और ग्राम सभा की मजबूती जैसे मुद्दों पर जोर दिया।

 

जल, जंगल, जमीन की रक्षा को केवल आदिवासी नहीं, बल्कि समूचे समाज की जिम्मेदारी बताया।

 

मोहन प्रधान ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए टांटिया मामा, बिरसा मुंडा, फूलो-झानो, वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, रानी दुर्गावती, राणा पूंजा भील जैसे वीर-वीरांगनाओं की अमर गाथाएं सुनाईं और कहा कि इनके योगदान को पाठ्यक्रमों और इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए।

🌿 विशिष्ट अतिथि के विचार

 

विशिष्ट अतिथि निर्मल सिंह राज, उपाध्यक्ष आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा, ने कहा कि आदिवासी शक्तिपीठ की स्थापना आदिवासियों के बीच समन्वय स्थापित करने और उनकी सांस्कृतिक-धार्मिक पहचान को सहेजने के लिए की गई है। यहाँ पुरखों के पेन (देवी-देवता) स्थापित हैं और वर्षों से समाज की समस्याओं के समाधान के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने 11 अगस्त को आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा में होने वाले भव्य विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम में आमंत्रण भी दिया।

 

📜 इतिहास और चेतना का संदेश

कार्यक्रम का संचालन सरजू सरोठिया, जिला अध्यक्ष शंभू शक्ति सेना कोरबा, ने किया। उन्होंने रानी दुर्गावती मंडावी के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अकबर की सेनाओं के सामने कई साम्राज्यों ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन रानी दुर्गावती ने अदम्य साहस से संघर्ष किया।

उन्होंने कहा — “अगर हमारे महापुरुषों की गौरवगाथा इतिहास में नहीं बताई जाती, तो शंभू शक्ति सेना की जिम्मेदारी है कि हम इसे दुनिया के सामने लाएं।”

🤝 जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपस्थिति

इस अवसर पर मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि के साथ-साथ रमेश सिरका (संगठन प्रमुख), कौशल्या विश्वनाथ (जनपद उपाध्यक्ष), जगलाल राठिया, पवन कंवर, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, लेमरू थाना के पुलिसकर्मी, और आसपास क्षेत्रों के समस्त जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

✨ लोगों की प्रतिक्रिया

 

दर्शकों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने गौरवशाली और पराक्रमी इतिहास की इतनी विस्तृत जानकारी मिली। बहुत सी बातें जो अब तक केवल किताबों, टीवी या बातचीत के माध्यम से ही सुनी थीं, अब प्रत्यक्ष रूप से सुनने का अवसर मिला।

 

अंत में शंभू शक्ति सेना के अध्यक्ष सरजू सरोठिया ने सभी का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का समापन राजकीय गीत के साथ हुआ। यह आयोजन पूरे क्षेत्र में एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक, खेल और पर्यावरणीय पर्व के रूप में याद किया जाएगा

 

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें

Leave a Comment

और पढ़ें

मतदान सर्वेक्षण

7
Default choosing

Did you like our plugin?

और पढ़ें