**हसदेव बचाओ पदयात्रा: प्रेमनगर से शुरू, गणेशपुर तक अद्वितीय यात्रा**
28 जनवरी, गणेशपुर: हसदेव बचाओ पदयात्रा ने प्रेमनगर से अपना सफर आरम्भ किया। इस महत्वपूर्ण यात्रा को सुखमनिया जगते, अशोक जगते, सुरेन्द्र करियाम, क्षितिज उईके, और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया।
यह पदयात्रा जल, जंगल, और जमीन की संरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है। गणेशपुर में रुकते समय ग्रामीणों ने हसदेव पदयात्रा का गर्म स्वागत किया और उनका समर्थन दिया।
पदयात्रा में शामिल होने वाले लोगों ने जमकर नारेबाजी की और अपने समर्थन का इजहार किया। भीड़ के बीच में पदयात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली।
रोहित मरपच्ची, गणेशपुर के सरपंच ने इस मुहिम को समर्थन दिया और लोगों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। पूर्व सरपंच ने भी लोगों को आश्वासन दिया कि वे इस मुहिम में अपना समर्थन जारी रखेंगे।
गणेशपुर में रात्रि भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई, और सुबह के भोजन के लिए भी बंदोबस्त की गई। समाजिक और पारिस्थितिक मुद्दों पर विचार-विमर्श भी हुआ और लोगों ने अपनी भागीदारी का आश्वासन दिया।
हसदेव बचाओ पदयात्रा के सफल आयोजन में सरपंच, पूर्व सरपंच, और ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस सामाजिक और पर्यावरणीय अभियान में सभी का सहयोग और समर्थन आवश्यक है।
इस पदयात्रा में कई अन्य दलों के लोग भी समर्थन कर रहे हैं जिसमें हरिहरपुर के हसदेव बचाओ संघर्ष समिति की युवा टीम, शंभू शक्ती सेना , सर्व आदिवासी समाज, मुख्य रूप से पदयात्रा का रोड मैप में जितने भी सरपंच की भूमिका है वह महत्वपूर्ण मानी जा रही है इस हरदेव बचाओ पदयात्रा में रात्रि विश्राम भोजन की व्यवस्था रोड मैप के अनुसार सरपंचों के द्वारा किया जा रहा है जो आदिवासी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका भी अदा करती है क्योंकि आदिवासी जल जंगल जमीन से जुड़ा है इसलिए हसदेव मामला सबसे ज्यादा आदिवासियों के मध्य आवाज उठाई जा रही है
आदिवासी समाज हसदेव बचाओ संघर्ष समिति के माध्यम से सन 2008 से लगातार हसदेव बचाओ अभियान आंदोलन कॉरपोरेट सेक्टर के खिलाफ खड़ी करके रखी है जो सरगुजा संभाग में हसदेव बचाओ मंच के माध्यम से संयोजक रमेश ठाकुर के द्वारा किया जा रहा है जो कल हसदेव पदयात्रा का तीसरा दिन था और आज गणेशपुर से चौथा दिन के लिए हसदेव बचाओ पदयात्रा प्रारंभ होगा
धन्यवाद, मैं आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर एक सारांश तैयार करता हूँ:
**हसदेव बचाओ पदयात्रा: सामाजिक एवं पर्यावरणीय संदेश का प्रचार**
– **समर्थकों का साथ:** पदयात्रा को प्रेमनगर से शुरू कर गणेशपुर तक विस्तार से किया गया। सुखमनिया जगते, अशोक जगते, सुरेन्द्र करियाम, क्षितिज उईके, और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे समर्थन दिया।
– **संदेश का प्रचार:** यह पदयात्रा जल, जंगल, और जमीन की संरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है। गणेशपुर में भी लोगों ने इसे विरोध न करते हुए स्वागत किया।
– **सहभागिता:** स्थानीय सरपंच और पूर्व सरपंच ने इस मुहिम का समर्थन किया और लोगों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।
– **सामाजिक समर्थन:** रात्रि भोजन और विश्राम के लिए व्यवस्था की गई और सामाजिक विचार-विमर्श हुआ। ग्रामीणों और समाज के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने इसे और भी सशक्त बनाया।
– **नेतृत्व की भूमिका:** रमेश ठाकुर, बृजमोहन गोंड, और अन्य नेताओं की सहभागिता ने इसे और भी प्रभावी बनाया।
इस पदयात्रा का महत्वपूर्ण संदेश है कि जल, जंगल, और जमीन की संरक्षा सभी का सामाजिक और वातावरणिक दायित्व है।
**हसदेव बचाओ पदयात्रा: ग्रामीणों का सामर्थ्य साबित, सामाजिक जागरूकता में उत्तेजना**

28 जनवरी, गणेशपुर: हसदेव बचाओ पदयात्रा ने अपने प्रवास की दूसरी चरण का सम्मानीत प्रारंभ किया। प्रेमनगर से शुरू होकर यह पदयात्रा गणेशपुर तक पहुंची, जहां ग्रामीण समुदायों ने उसका वारंवार स्वागत किया।
इस आधार पर एक बार फिर, स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा का समर्थन किया, जिसने सामाजिक एवं पर्यावरणीय संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
इस पदयात्रा में लोगों ने अपने समर्थन की जी जबरदस्त ताकत दिखाई, जिससे गणेशपुर के स्थानीय समुदायों को एक सामूहिक उत्साह और जागरूकता मिली।

समुदाय के नेताओं ने भी व्यापक समर्थन और सहयोग का वादा किया, जिससे यह सामाजिक अभियान और भी सशक्त हो गया।
इस तरह की पदयात्रा ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि जल, जंगल, और जमीन की संरक्षा केवल एक व्यक्ति या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समस्त समाज का दायित्व है।
इस अभियान में सामाजिक एवं पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा मिला है और स्थानीय समुदायों का सामर्थ्य दिखाया गया है।
बृजमोहन गोंड –
यह पदयात्रा न केवल एक संदेश देने का माध्यम है, बल्कि यह एक सामाजिक बदलाव का आरंभ है जो हमारे पर्यावरण और समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
Author: Shambhoo Dwip
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