एक तरफ हसदेव बचाओ अभियान सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश में चलाया जा रहा है क्योंकि राजस्थान को कोयले की आपूर्ति छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के हसदेव बचाओ क्षेत्र से ही प्राप्त होने हैं ऐसे में राजस्थान के सीएमडी आर के शर्मा ने अपनी नाराजगी व्यक्त किया है कि हमारे यहां कोयले की विकराल संकट होने वाली है और हमने छत्तीसगढ़ के सरकार को 7000 करोड रूपए राजस्व के रूप में पहले ही दे दिए हैं लेकिन हमें अभी तक कोयले की आपूर्ति नहीं कराया गया है राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच आदिवासियों का भी एक आम भूमिका है जो हसदेव बचाओ आंदोलन लगातार 10 सालों से आगे बढ़ा रहे हैं जिस कारण कोहली की आपूर्ति छत्तीसगढ़ सरकार नहीं कर पा रही हैं

राजस्थान में ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है और यह बड़ा मुद्दा है। राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (RRVUNL) के CMD आर के शर्मा ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्हें राजस्थान की कोयले की समस्या के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आरआरवीयूएनएल ने सुरगुजा में लाख पेड़ लगाए है और करीब पांच हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर दिए हैं। अब तक छत्तीसगढ़ सरकार को 7 हजार करोड़ का राजस्व भी चुकाया है।
CMD आर के शर्मा ने कहा कि पिछले तीन सालों में यह मेरी करीब सातवीं विज़िट है और पिछले दो सालों में लगातार राजस्थान कोल क्राइसिस से जूझ रहा है। हमारे यहां पर टोटल 7580 मेगावाट के पॉवर प्लांट्स हैं। जिनमें से 4340 मेगावाट का जो जनरेशन है, वह छत्तीसगढ़ की माइंस से लिंक्ड है। उनका कोयला यहीं से जाता है।

50 प्रतिशत से अधिक कोयले की सप्लाई यदि रुक जाएगी, तो राजस्थान कैसे अपनी ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करेगा। हमें जो क्लीयरेंस मिलना है सारी की सारी, चाहे वह सेंट्रल गवर्नमेंट से हो या फिर स्टेट गवर्नमेंट से, हमें सारी वैधानिक स्वीकृतियाँ मिल चुकी हैं। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट से भी जो कुछ केस थे, उनमें भी हमें आगे बढ़ने की परमिशन दे दी गई है।
राजस्थान में बिजली आपूर्ति में बाधा आ रही
तो ऐसी स्थिति में अब किसी भी कारण से यदि यह माइन शुरू नहीं होती है, तो राजस्थान की जनता को बिजली की आवश्यकता की आपूर्ति में जो बाधा आ रही है, उससे राजस्थान को बहुत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जब हम कोल इंडिया लिमिटेड से कोयला ले रहे हैं, तो वो कहां से देंगे, यह उन पर निर्भर करता है। किस क्वालिटी का मिलेगा, यह भी उन्हीं पर है।
महंगा मिल रहा कोयला
हमें हमारी माइंस से जो कोयला मिलता है, वह अच्छी क्वालिटी का मिलता है। दूसरा, जब आप ओवर एंड अबव लिमिट से ज्यादा कोयला लेंगे, जो आपका उनके साथ एग्रीमेंट है, तो उसकी कॉस्ट भी वो प्रीमियम चार्ज करते हैं। तो हमें महंगा कोयला मिल रहा है। कोयले की गुणवत्ता भी वह नहीं है, जो हमें अपनी माइंस से मिल रही थी।
क्या बिना पेड़ काटे कोयला निकाल सकते हो ?
मुझे यह बताइए कि क्या कोई भी जगह ऐसी है, जहां आप पेड़ काटे बिना कोयला निकाल सकते हो ? कहीं निकल सकता है क्या ? आज इतने सारे स्टेट हाइवेज़ निकले हैं, कितने पेड़ कटे होंगे ? वहां तो कोई मुद्दा नहीं बना। आज यहां क्यों यह मुद्दा बन रहा है ?
‘4 लाख पेड़ निगम ने लगवाया’
पेड़ काटने की बात करते हो, वैधानिक स्वीकृतियां जो मिलती हैं, उनमें जो डेफॉरेस्ट्रेशन होता है। उसके अगेंस्ट में रिफॉरेस्ट्रेशन कैसे करना है। उसके लिए बहुत सारे प्रावधान दिए हुए हैं। एक पेड़ काटने के अगेंस्ट में दस पेड़ लगाने पड़ते हैं। 4 लाख पेड़ तो उत्पादन निगम लगवा चुका है। वो सारे के सारे पेड़ बड़े पेड़ों में डेवलप हो गए हैं। कोई भी मीडिया वाला जाकर देख सकता हैं।
’39 लाख पेड़ लगवा चुके हैं’
कम से कम 39 लाख पेड़ हम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट वालों के साथ मिलकर लगवा चुके हैं। हमें जो आदेश मिलेगा, हम कहीं भी पीछे नहीं हैं। फॉरेस्ट्रेशन और इकोलॉजिकल बैलेंस देश की आवश्यकता है। वह हमें मैंटेन करना चाहिए। उसके लिए हर संभव प्रयास उत्पादन निगम करेगा।
‘दोनों सरकारें मिलकर करेंगी काम’
छत्तीसगढ़ गवर्नमेंट के साथ में भी हमारे पुराने मुख्यमंत्री ने भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बहुत बार विज़िट भी किया था। अभी जो राजस्थान के सीएम हैं, उन्होंने भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को लेटर लिखा है, बात भी की है। अधिकारियों का पूर्ण सहयोग है, वो पूरी कोशिश कर रहे हैं। जो भी सहयोग लगेगा, दोनों सरकारें मिलकर करेंगी।
Author: Shambhoo Dwip
जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें










