कोरबा समाचार/
आज शिक्षा व्यवस्था पूरे भारत देश में संचालित हो रही है जगह जगह विद्यालय है जहा बिना भेद भाव लड़की लड़का किसी जाति धर्म मजहब के सब एक साथ पढ़ाई कर रहे है पर हम अक्सर भूल जाते है एक समय शिक्षा ले पाना सामान्य नही था भेदभाव,छुआछूत,जातिवाद समस्याओं ने देश को जकड़ रखा था महिलाओं को शिक्षा का अधिकार नहीं था सामाजिक बुराई की श्रेणी में समझा जाता था उस दौर में माता सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के किसान परिवार में होता है और उसकी शादी महज 8 वर्ष में ज्योतिबा फुले से होती है उसने अपनी शिक्षा दीक्षा अपने पति से लेती है और सभी कुरीतिया बुराइयां को जड़ से मिटाने ठान लेती हैं और महज 17 वर्ष की उम्र में महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय खोलकर पढ़ाना शुरू करती है वहा लोग काफी विरोध करते है उन्हे विद्यालय जाते समय उनपर कीचड़ फेंकते है,पत्थर से मरते है रास्ते रोकते है पर उनकी सपनो में जान होती है उनकी लक्ष्य अटल होती है वह सब सहन करती आगे बढ़ती है,विधवा आश्रम खोलती है विधवाओं को वहा शिक्षा देती है और तमाम बुराइयों को समाप्त करने अभियान चलाती है

सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पालिया जी द्वारा दिनांक 03 जनवरी 2024 को लगातार कई जगहों पर जाकर जयंती मनाई गई और लोगो को जागरूक किया गया..
भारत देश की प्रथम महिला शिक्षिका, प्रथम बालिका विद्यालय स्थापनाकर्ता और महान समाज सेविका माता सावित्री बाई फुले के अवतरण दिवस के अवसर पर दिनांक 3 जनवरी 2024 को तीन जगहों पर अवतरण दिवस को सामूहिक रूप से मनाने का शानदार अवसर मिला !
1.सबसे पहले मेरे विद्यालय प्राथमिक शाला दर्रापारा मे केक काटे,बच्चो को चाकलेट व मिक्चर वितरण किये!
2. दूसरी जगह मे स्वामी आत्मानंद स्कूल हायर सेकेण्डरी पंप हाऊस वार्ड क्रमांक 14 कोरबा मे माता सावित्री बाई फुले का बड़ा पोस्टर छत्तीसगढ़िया युवा संगठन के बैनर तले विद्यालय को प्रदान किये व बच्चों को चाकलेट वितरण किये!
3. तीसरा कार्यक्रम पुलिस लाईन कोरबा मे माता सावित्री बाई फुले का अवतरण दिवस मनाये !
इस महान समाज सेविका माता सावित्री बाई फुले को सादर नमन और सेवा जोहार हैं
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Author: Shambhoo Dwip
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