भारत की पहली शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले,संविधान सभा सदस्य आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा जी जन्म जयंती मनाई गई – भानमती वाकरे सामाजिक कार्यकर्ता

आज दिनांक 3/1/2024 दिन बुधवार को जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के ब्लॉक मरवाही के ग्राम गुदूमदेवरी के मंदिर टोला स्कूल में सामाजिक कार्यकर्ता भानमती वाकरे,जयश्री वरकड़े जी के द्वारा वहा उपस्थित शिक्षक शिक्षिका और बच्चो के साथ भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले और संविधान सदस्य आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा जी को उनके जन्म जयंती पर उनके तस्वीर के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर उनके संघर्षों को बच्चो,शिक्षक और वहा उपस्थित लोगों को बताया….

माता सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के एक किसान परिवार में हुआ था। उनका विवाह मात्र 9 वर्ष की उम्र में 1840 में ज्योतिराव फुले से हुआ था। ज्योतिराव फुले उनके संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। उन्होंने सावित्रीबाई को शिक्षा दी और उन्हें समाज सेवा में जुटने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने 1848 में अपने पति के साथ मिलकर बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की शुरुवात की यह भारत का पहला विद्यालय था उस समय देश में महिलाओं पर शिक्षा को लेकर पाबंदी हुआ करती थी विद्यालय खुलने के बाद सभी जातियों के लोग विद्यालय आया करते थे उस समय सावित्री बाई फुले जब विद्यालय जाया करती थी तब उनपर कीचड़,गोबर,पत्थर फेंका जाता था माता सावित्रीबाई फुले सब सहन करते हुए आगे बढ़ती थी और विद्यालय पहुंचकर फिर से बालिकाओं को पढ़ाना शुरू करती थी ,उन्होंने विधवा आश्रम की स्थापना की जहा वे शिक्षा और रोजगार प्राप्त कर सके ,उन्होंने बाल विवाह,सती प्रथा,जातिवाद,छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई, उन्होंने अनेक सामाजिक कार्य किए और 10 मार्च 1897 को प्लेग की बीमारी से उनकी निधन हो गई…

*जयपाल सिंह मुंडा* ????#जयपालसिंह_मुण्डा

 

????ओलम्पियाड में 1928 में भारत को #Gold_Medal दिलाने वाली भारतीय हॉकी टीम के कप्तान

????सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय #ऑक्सफोर्ड_यूनिवर्सिटी से PhD करने वाले पहले भारतीय

????देश की सबसे बड़ी लोकसेवा परीक्षा #_IAS उत्तीर्ण करने वाले पहले आदिवासी तथा

आदिवासी जनजातीय अधिकारों की पैरवी करने वाले संविधान समिति के मजबूत स्तम्भ और महान् व्यक्तित्व थे

जयपाल सिंह मुंडा का संदेश आदिवासी समाज के लिए एक प्रेरणा और एक मार्गदर्शक है। उन्होंने आदिवासियों को अपनी पहचान, अपनी जमीन, अपने संसाधनों, अपने अधिकारों और अपने स्वाभिमान के लिए लड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया उन्होंने आदिवासियों को शिक्षा, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और राजनीति में आगे आने का संदेश दिया ऐसे महापुरुष थे जयपाल सिंह मुंडा।

इन दोनो की संघर्ष त्याग समर्पण ,बलिदान को उपस्थित लोगो को बताया गया इस अवसर पर नरेंद्र कुमार पांडे (प्रधानाध्यापक), प्रियंका पेंद्रो,मालती वाकरे और लोग उपस्थित थे…सामाजिक कार्यकर्ता भानमती वाकरे माता सावित्री बाई फुले साथ में जयपाल सिंह मुंडा

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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