जमशेदपुर में उच्चस्तरीय चर्चा, शिक्षा, रोजगार, आरक्षण एवं संवैधानिक अधिकारों पर व्यापक मंथन
जमशेदपुर, 31 जनवरी। आदिवासी समाज की ज्वलंत समस्याओं के समाधान एवं उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने झारखंड के जमशेदपुर स्थित पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट कर विस्तृत एवं गंभीर चर्चा की।
यह मुलाकात मात्र औपचारिक भेंट न होकर आदिवासी समाज की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों तथा भविष्य की रणनीति पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण संवाद सिद्ध हुई। बैठक में शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, प्रशासनिक प्रतिनिधित्व तथा सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
समाज की चुनौतियों पर प्रतिनिधिमंडल ने रखी स्थिति
प्रतिनिधिमंडल में अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष एवं गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय सचिव श्री आर.एन. ध्रुव, बिलासपुर जिलाध्यक्ष श्री आर.सी. ध्रुव तथा जिला सक्ती के सामाजिक प्रमुख श्री नारायण सिदार शामिल रहे।
प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों में आदिवासी समाज को शिक्षा, रोजगार, प्रशासनिक अवसरों तथा योजनाओं के लाभ से वंचित रहने की समस्याओं से अवगत कराया।
अर्जुन मुंडा के अनुभव और मार्गदर्शन पर भरोसा
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि श्री अर्जुन मुंडा ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है। जनजातीय विकास, शिक्षा, छात्रवृत्ति योजनाओं और अधिकारों के संरक्षण की दिशा में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए समाज को उनसे सकारात्मक मार्गदर्शन की अपेक्षा है।
श्री मुंडा ने प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि आदिवासी समाज के विकास के लिए संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।
पदोन्नति में आरक्षण का प्रमुख मुद्दा
बैठक में छत्तीसगढ़ में पदोन्नति में आरक्षण का विषय प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने बताया कि न्यायालयी प्रक्रियाओं और नीतिगत अस्पष्टताओं के कारण आदिवासी कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय पर समाधान हेतु पहल की अपेक्षा व्यक्त की।
सहायक शिक्षकों की लंबित काउंसलिंग पर चिंता
बैठक में सहायक शिक्षकों की लंबित छठवीं काउंसलिंग का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधियों ने बताया कि हजारों प्रशिक्षित आदिवासी युवा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं और लंबे समय से आंदोलनरत हैं। यदि शीघ्र काउंसलिंग प्रारंभ हो, तो बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में स्थानीय भर्ती की मांग
प्रतिनिधियों ने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता न मिलने से रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं। स्थानीय भाषा और संस्कृति से परिचित युवाओं की नियुक्ति प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकती है।
शिक्षा योजनाओं में आय सीमा पर पुनर्विचार की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छात्रवृत्ति एवं शिक्षा योजनाओं में लागू आय सीमा के कारण अनेक आदिवासी विद्यार्थी लाभ से वंचित हो रहे हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए आय सीमा को समाप्त या संशोधित करने की मांग रखी गई।
फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर सख्त कार्रवाई की मांग
बैठक में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लेने के मामलों पर भी चिंता जताई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि इससे वास्तविक पात्र युवाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
मुंडा का आश्वासन
श्री अर्जुन मुंडा ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि वे इन विषयों को उचित मंचों पर उठाने का प्रयास करेंगे और सामाजिक संगठनों को संवैधानिक एवं संगठित तरीके से अपनी मांगें रखने का सुझाव दिया।
आत्मीय वातावरण में संवाद
चर्चा के उपरांत प्रतिनिधिमंडल को रात्रि भोज के लिए आमंत्रित किया गया, जहां आत्मीय वातावरण में सामाजिक विषयों पर अनौपचारिक चर्चा भी हुई। प्रतिनिधियों ने श्री मुंडा के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
जमशेदपुर में हुई यह भेंट आदिवासी समाज की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर हुई यह चर्चा भविष्य में सकारात्मक परिणामों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
आदिवासी समाज की उन्नति राष्ट्र की समग्र प्रगति से जुड़ी है और इस प्रकार के संवाद सामाजिक विकास की दिशा में आशा का संदेश देते हैं।
Author: Shambhoo Dwip
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