बेमेतरा, 25 सितंबर।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने वाले गोंडवाना के महान क्रांतिकारी अमर शहीद राजा शंकर शाह मंडावी और कुंवर रघुनाथ शाह मंडावी की 168वीं बलिदान दिवस आज मुँगलाटोला (साजा, जिला बेमेतरा) में श्रद्धा, सम्मान और गर्व के साथ मनाई जाएगी।
गोंडवाना के इन वीरों ने न केवल ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका, बल्कि आदिवासी अस्मिता, जल–जंगल–जमीन और स्वाभिमान की रक्षा का अमर संदेश दिया।
कार्यक्रम की मुख्य झलक
इस अवसर पर आयोजित विशाल श्रद्धांजलि समारोह में नीलकंठ टेकाम (विधायक, केशकाल एवं प्रदेश अध्यक्ष गोंडवाना गोंड महासभा, छत्तीसगढ़) मुख्य अतिथि रहेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आर. एन. ध्रुव, प्रदेश अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ करेंगे।
अति विशिष्ट अतिथि के रूप में ईश्वर साहू (विधायक, साजा विधानसभा), कर्मा सम्राट घनश्याम सिंह ठाकुर (राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित), मुरीत मंडावी (जिला अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज बेमेतरा), दरबार सिंह नेताम (जिला अध्यक्ष गोंडवाना गोंड महासभा बेमेतरा), एच. आर. ध्रुव (जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ बेमेतरा) सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक नेता मौजूद रहेंगे।
आदिवासी अस्मिता और वर्तमान संघर्ष
कार्यक्रम के दौरान वक्ता शंकर शाह–रघुनाथ शाह के बलिदान को याद करते हुए यह संदेश देंगे कि जल–जंगल–जमीन आज भी आदिवासी समाज की जीवनरेखा है।
जैसे इन वीरों ने अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी, वैसे ही वर्तमान समय में भी आदिवासी समाज खनन, अवैध वन कटाई, जमीन अधिग्रहण और प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ अपनी परंपरागत पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्षरत है।
आयोजकों ने कहा कि यह बलिदान दिवस केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों और संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूक करने का संकल्प दिवस भी है।
गोंडवाना के ये अमर शहीद आज भी हमें याद दिलाते हैं कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व का आधार हैं, जिनकी रक्षा करना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
Author: Shambhoo Dwip
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