आदिवासियों को जीते जी भी नहीं मिल रही जमीन, मरने के बाद भी अपमानजनक हालात

**गोंड सरपंच का अंतिम संस्कार सड़क पर, श्मशान भूमि पर अवैध कब्जे से आदिवासी समुदाय में आक्रोश**

*ग्राम उमरिया, बिल्हा, बिलासपुर | दिनांक: 09 जून 2025*

 

ग्राम उमरिया, तहसील बिल्हा, जिला बिलासपुर में आदिवासी समुदाय से जुड़े एक अत्यंत दुखद और गंभीर मामले ने जनचेतना को झकझोर दिया है। गांव के एक गोंड आदिवासी सरपंच की अकाल मृत्यु के बाद, उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सड़क किनारे करना पड़ा क्योंकि परंपरागत *मिट्टी संस्कार* के लिए गांव की श्मशान भूमि में स्थान नहीं मिला।

यह मामला सिर्फ एक श्मशान भूमि का नहीं, बल्कि आदिवासियों की जमीन, संस्कृति और अधिकारों से जुड़े गहरे सवाल खड़े करता है। जानकारी के अनुसार, ग्राम उमरिया में सर्व समाज के लिए एक श्मशान भूमि है, जिसमें गोंड समाज अपने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार दफन संस्कार करता रहा है, जबकि अन्य समाज के लोग अग्नि संस्कार करते हैं। दोनों के लिए श्मशान भूमि के भीतर पृथक-पृथक स्थान निर्धारित हैं।

 

हालांकि बीते कुछ वर्षों में उक्त श्मशान भूमि के गोंड समाज वाले हिस्से पर गैर-आदिवासी लोगों द्वारा अवैध रूप से मकान, बाड़ी और खेत बना लिये गए हैं। जिससे पारंपरिक दफन संस्कार की व्यवस्था बाधित हो रही है। ग्रामवासियों ने यह भी बताया कि उक्त भूमि *खसरा नं 351/1, रकबा 5.5040 हेक्टेयर* (लगभग 13.65 एकड़) राजस्व रिकार्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, जिसका उपयोग कई पीढ़ियों से अंतिम संस्कार के लिए किया जाता रहा है।

 

पूर्व सरपंच के कार्यकाल में मार्च 2022 में पंचायत द्वारा उक्त भूमि को श्मशान के रूप में चिन्हांकित करने हेतु तहसीलदार बिल्हा को आवेदन दिया गया था, लेकिन सरपंच के असामयिक निधन के बाद यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई।

 

उक्त स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामवासियों के अनुरोध पर **छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा** और **आदिवासी स्टूडेंट यूनियन** के प्रतिनिधिमंडल ने ग्राम उमरिया का दौरा किया। प्रतिनिधियों ने गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं से चर्चा कर वास्तविक स्थिति को समझा और मौके पर जाकर श्मशान भूमि पर अवैध कब्जों का निरीक्षण किया।

 

प्रतिनिधिमंडल में **रमेशचन्द्र श्याम (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष)** के साथ **समय सिंह गोंड (कार्यकारी जिला अध्यक्ष), अनिल ध्रुव (प्रदेश संयोजक, आदिवासी स्टूडेंट यूनियन), जगदीश प्रसाद सिदार, शिवचरण जगत (जिला कोषाध्यक्ष), घनश्याम खुशरो (सचिव, गोंड समाज, सीपत परिक्षेत्र)** शामिल थे।

 

बैठक में निर्णय लिया गया कि तहसीलदार बिल्हा की ओर से शीघ्र कार्रवाई की प्रतीक्षा की जाएगी। यदि उचित समाधान नहीं निकलता, तो यह मुद्दा कलेक्टर बिलासपुर के समक्ष रखा जाएगा।

 

इस दौरान गांव के सम्मानित सजन – मेलन बाई मरावी, मंकी बाई मरकाम, लीला बाई मरावी, उर्मिला मरकाम, रेखा मरकाम, लता मरकाम, मीणा मरावी, बिरम बाई मरावी, रुख्मनी मरकाम, देवकी मरावी, विनोद मरावी, सुखीराम छेदैहा, उमेदी मरकाम, सुकालू राम मरकाम, श्यामलाल मरकाम सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

 

यह मामला केवल एक गांव या एक समाज का नहीं है — यह आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर शासन-प्रशासन को शीघ्र

संज्ञान लेना चाहिए।

 

#गोंड समाज के पारंपरिक ‘मिट्टी संस्कार’ के लिए नहीं बची जगह

 

#श्मशान भूमि पर मकान और खेत बना चुके हैं गैर-आदिवासी – ग्रामवासियों का आरोप

 

#मार्च 2022 से लंबित है श्मशान भूमि का प्रस्ताव, अब तक नहीं हुई कार्यवाही

 

#गोंडवाना गोंड महासभा और आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ने किया गांव का दौरा

 

#तहसीलदार से जवाब का इंतज़ार, समाधान न मिलने पर कलेक्टर से की जाएगी भेंट

 

#आदिवासी अस्मिता और अधिकारों पर हो रहा हमला – प्रतिनिधिमंडल ने जताई चिंता

 

#बड़े पैमाने पर ग्रामीणों की सहभागिता, न्याय

की मांग तेज़

 

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें

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