ठाकुर देव महोत्सव 2025: आदिवासी संस्कृति का भव्य उत्सव

 

रायगढ़ – ग्राम चंद्रशेखरपुर एडु मांड कुरकुट संगम में राठिया-कंवर समाज** द्वारा **27-28 फरवरी 2025** को **ठाकुर देव महोत्सव** का आयोजन किया गया। यह दो दिवसीय आयोजन **आदिवासी परंपरा, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक आस्था** का प्रतीक बना। हजारों श्रद्धालुओं, समाज के प्रमुख जनों और युवा शक्ति की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।

### **भक्ति और आस्था से ओतप्रोत शुभारंभ**

महोत्सव की शुरुआत **ठाकुर देव जी** की **धार्मिक पूजा-अर्चना और सेवा पूजा** से हुई। **बाजा-गाजा और पारंपरिक मांदर की थाप** से संपूर्ण क्षेत्र भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।

इसके पश्चात, **गाँव के बैगा श्री केशव प्रसाद राठिया जी** के निवास से **भव्य कलश यात्रा** निकाली गई। श्रद्धालुओं ने **आदिवासी परंपरागत वेशभूषा** में सजकर यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा **देवरास** तक पहुँची, जहाँ ठाकुर देव की **विशेष पूजा** कर कलश की स्थापना की गई।

 

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### **सामूहिक विवाह: समाज की एकता और परंपरा का पर्व**

**ठाकुर देव ट्रस्ट** के तत्वावधान में **11 जोड़ों का विवाह** संपन्न हुआ। यह विवाह **आदिवासी रीति-रिवाजों एवं ढेढ़ा पद्धति** के अनुरूप संपन्न हुआ।

✔ **तेल और मड़वा रस्मों** ने आदिवासी परंपरा को पुनर्जीवित किया।

✔ **हरदाही, बारात एवं बिदाई** की रस्मों ने माहौल को उल्लासमय बना दिया।

 

### **लोकसंस्कृति की अनुपम झलक**

महोत्सव में **ठाकुर देव भजन, सुवा नृत्य और करमा नृत्य** की प्रस्तुतियों ने आदिवासी लोकसंस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

### **जनप्रतिनिधियों का सम्मान और समाज का उत्थान संकल्प**

इस अवसर पर समाज के नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। उन्होंने **आदिवासी समाज के उत्थान और संस्कृति संरक्षण** के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।

### **युवाओं और विकास समितियों की भूमिका**

**राठिया-कंवर विकास समिति, उत्थान समिति और ठाकुर देव ट्रस्ट** ने आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। समाज के युवा (वालंटियर्स) भी पूरे महोत्सव में सक्रिय रहे, जिससे यह आयोजन **संगठित और भव्य रूप** में संपन्न हुआ।

 

*महोत्सव का सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव*

यह आयोजन **सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक** बन गया। इसने समाज में **आत्मगौरव और सांस्कृतिक जागरूकता** को बढ़ावा दिया।

 

**रिपोर्ट: अजय राठिया**

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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