गोण्डी भाषा संरक्षण व संवर्धन की ओर एक कदम ग्राम गढ़ उपरोड़ा (कोरबा, छ.ग.) में 11 फरवरी 2025 को मनाया गया गोंडी पखवाड़ा

 

कोरबा – गढ़ उपरोड़ा , *गोण्डीभाषाचार्य एवं गोण्डी भाषा प्रेमियो द्वारा गोण्डी भाषा संरक्षण संवर्धन हेतु 2-15 फरवरी गोण्डी पखवाड़ा के तहत की जा रही है विविध कार्यक्रम*
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विलुप्त हो रही भाषा के संरक्षण संवर्धन के प्रति जागरूकता हेतु 2 फरवरी से 15 फरवरी तक मनाए जा रहे गोण्डी पखवाड़ा को लेकर गोण्डी भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान रखने वाले लोगो मे उत्साह उल्लास का महौल दिख रहा है। गोण्डी भाषा के महत्व के साथ व्यापक रूप से बोलचाल में लाने पखवाड़ा के तहत प्रचार प्रसार हेतु रूपरेखा अनुरूप, समृद्ध सांस्कृतिक विविधता में गोण्डी भाषा के महत्व को समझने और इसके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त किया जा रहा है।

गोंडवाना रत्न मोतीरावण कंगाली जी की जयंती पर शिवनंदनपुर में गोंडी भाषा दिवस का भव्य आयोजन

गोडीभाषाचार्य एवं पर्यावरणविद् दादा शेरसिंह आचला जी, (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय गोण्डी भाषा सृजन समिति) शोधकर्ता, लेखक एवं संचालक- जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण एवं शोध संस्थान/नैसर्गिक पर्यावरण शिक्षा निकेतन ज्ञान बाड़ा-दमकसा, तह.-दुर्गुकोंदल, जिला-उ.ब. कांकेर (छत्तीसगढ) ने इस आयोजन के लिए युवाओ द्वारा की गई चिंतन व महत्वपूर्ण आयोजन का सराहना किये और बताए कि गोण्डी प्राचीन मौलिक भाषा है जो विलुप्त होते हुए कुछ ही राज्य मे बचे है। वे भी संकट की स्थिति मे विलुप्त होने की संभावनाए पर है। ऐसे मे इस प्रकार की पहल बहुत कारगर है जिससे जहां जहां गोण्डी बोली जाती है वहां बचाए व बनाए रखा जाए। भारत की सबसे प्राचीन भाषा आज के आधुनिक दौर में विलुप्त न हो पाए। गोण्डी भाषा के अस्तित्व की चिंता वैश्विक स्तर पर भी की जा रही है जिसके कारण आज गोण्डी भाषा अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में गिनी जाती है। बीते वर्षो के दौरान गूगल और न्यूजीलैंड की कंपनी ने मिलकर गोण्डी भाषा का गूगल यूनिकोड फॉर्मेट भी तैयार किया है जिससे सीधे भाषा को टाइप करके गोण्डी में जानकारी प्राप्त कर सकते है।
आज के समय मे गोण्डी मातृ भाषी वक्ता लगभग 30 लाख लोग है पर उनकी संख्या अन्य भाषाओं के संपर्क से धीरे धीरे कम होते जा रही है। गोण्डी भाषा का संबंध भारत की सबसे पहली और पुरानी सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता से है, सिंधु घाटी सभ्यता में विभिन्न चीजो में अंकित चित्र लिपिओ को पढ़ने की कोशिश लगातार गोण्डी भाषा के जरिये की जा रही है। भाषाविदों का दावा है कि गोण्डी भाषा को उसके उच्चारण और प्रीक्टोग्राफ के आधार पर सभी द्रविण परिवार के भाषा की जननी माना गया है। यंहा तक कि हड्डपन लिपि को भी दाये से बाएं लिखा जाता है जिसका सांस्कृतिक आधार गोण्ड समाज मे मौजूद है वे सारे कार्य दाये से बाएं ही करते है। द्रविण पूर्व की भाषा गोण्डी के जरिये पढा जा सकता है इसीलिए इतिहासकार, शोधकर्ता और समाज का बुद्दिजीवी वर्ग इस भाषा के सरंक्षण संवर्धन के लिए अत्यधिक चिंतित है। बहुत सारे आदिवासी मौलिक भाषाएं जैसे भील, मीना समुदाय की अपनी भाषाएं प्रायःनष्ट हो चुकी है किंतु संस्कृति अभी शेष है उनका भी जीर्णोद्धार गोण्डी के माध्यम से किया जा सकता है। गोण्डी भाषा का केवल भाषयिक महत्व न होकर पर्यावरण संरक्षण , जैवविविधता तथा जीवन का संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयो से है। भाषाविदों और इतिहासकारो द्वारा मनुष्य की उत्पत्ति के साथ प्राकृतिक जीव जंतु, वनस्पत्तियो की आवाज तथा उनके व्यवहार के साथ ही इस भाषा की उत्पत्ति मानी जाती है इसे प्रकृति की भाषा भी कहा जाता है। जिसके कारण इस भाषा के जानकार भले ही अशिक्षित हो पर प्रकृति की हलचलों को जानने व समझने में सक्षम हो पाते है और घोर अभाव की स्थिति में भी बिना किसी सुविधा सहायता और आधुनिक यंत्रो के प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर अपना और अपने परिवार का जीवन को बचाते आये है। डॉ.मोतीरावेन कंगाली जी ने गोण्डी भाषा की लेखन और उद्बोधन के क्षेत्र मे राष्ट्रीय स्तर पर काम किए। उन्होने मोहन जोदड़ो हड़प्पा सभ्यता मे सैंध्दवी लिपी से लिखे लेख को गोण्डी लिपी से पढने का प्रयास किये। इस पर किताब भी लिखे गए है जिन्हे युवाओ को पढना चाहिए। संरक्षण संवर्धन हेतु गोण्डी भाषा प्रेमियो को राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण की दिशा से शब्दावली का मानकीकरण किये गए किताब पढने की आवश्यकता है।
आने वाली पीढियां इस भाषा को जीवंत रख पाए इसलिए गोण्डी पखवाड़ा को लेकर पूरे गोण्ड समाज ही नही अपितु सभी इस भाषा को चाहने वाले उत्साहित है। राष्ट्रीय गोण्डी भाषा सृजन समिति के अध्यक्ष होने के नाते इस पखवाड़ा को इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने सभी गोण्डी भाषा प्रेमी व गोण्ड समाज चाहे ब्लाॅक, जिला स्तर, संभाग स्तर, राष्ट्रीय स्तर पर पदाधिकारीगण हो, सभी को आगे आने की नितांत आवश्यकता है ताकि छत्तीसगढ ही नही भारत के जिन राज्यो मे गोण्डी भाषा बचा है उन सभी राज्यो मे भी संरक्षण संवर्धन के उद्देश्य से गोण्डी पखवाड़ा मनाया जाने प्रेरित करते हुए गोण्डी भाषा संरक्षण संवर्धन के क्षेत्र मे कार्य कर रहे सभी भाषा प्रेमियो को बधाई शुभकामनाए दिया गया।

गोंडी भाषा संरक्षण के लिए गोंडी पखवाड़ा: भाषा बचाने का ऐतिहासिक प्रयास
इस अवसर पर शंभू शक्ति सेना के तमाम युवा साथी माता बहने उपस्थित हुए थे शंभू शक्ति सेना प्रदेश अध्यक्ष राकेश शांडिल्य,शंभू शक्ति सेना संस्थापक रघुवीर सिंह मार्को सर जी ने इस कार्यक्रम की सराहना कर शुभकामनाएं देते हुए इस अभियान को लगातार आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया 🙏

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें

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