**रायपुर |** कवर्धा में आयोजित एक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने जिस तरह आदिवासी धर्म, परंपरा और संस्कृति को नकारते हुए हिंदू धर्म की वकालत की, उससे राज्यभर के आदिवासी समाज में असंतोष फैल गया है। मुख्यमंत्री के इस बयान को कई आदिवासी संगठनों ने आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित बताया और इसे आदिवासी अस्मिता पर हमला करार दिया।
### **विष्णु देव साय पर सवाल**
विष्णु देव साय, जो खुद को आदिवासी समाज का प्रतिनिधि बताते हैं, उन पर आरोप लग रहा है कि वे आरएसएस के निर्देशानुसार आदिवासियों को हिंदू संस्कृति में मिलाने का प्रयास कर रहे हैं। गोंडवाना समाज और अन्य आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसके तहत आदिवासियों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को खत्म कर उन्हें हिंदू धर्म के अधीन करने की कोशिश की जा रही है।
### **मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना**
मुख्यमंत्री के बयान के बाद कई आदिवासी नेताओं और संगठनों ने इसका विरोध किया है। गोंडवाना स्वदेश के संपादक रमेश ठाकुर ने कहा,

> “छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सिर्फ नाम के आदिवासी हैं, उनका असली काम आदिवासी धर्म और परंपराओं को नकारकर आदिवासियों को हिंदू धर्म में मिलाने की आरएसएस की योजना को आगे बढ़ाना है।”
### **आदिवासियों से सवाल**
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या छत्तीसगढ़ के आदिवासी खुद को हिंदू मानते हैं? अगर नहीं, तो फिर अपनी अस्मिता, पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए उन्हें खुलकर बोलना होगा। पढ़े-लिखे आदिवासियों को गूंगा और अंधा समझा जाएगा, यदि वे अपने अधिकारों और धर्म की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाते।
### **गोंडवाना समाज की चेतावनी**
गोंडवाना समाज और अन्य आदिवासी संगठन इस मुद्दे पर एक बड़ी बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें मुख्यमंत्री के बयान पर चर्चा होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। संगठन यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि आदिवासी समाज किसी भी राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे के तहत अपनी परंपराओं को समाप्त नहीं होने देगा।
### **क्या कहते हैं आदिवासी बुद्धिजीवी?**
आदिवासी समाज के प्रमुख विचारकों का कहना है कि आदिवासियों का अपना अलग धर्म और संस्कृति है, जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। इसे जबरन किसी भी धर्म में समाहित करने का प्रयास आदिवासियों के अस्तित्व पर सीधा हमला है।
रमेश ठाकुर संपादक गोंडवाना दर्शन। – **अब समय आ गया है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अपने धर्म और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट हों और अपनी पहचान को बचाने के लिए खुलकर सामने आएं।**
Author: Shambhoo Dwip
जोहार शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल में आपका स्वागत है गोंडवाना की धरती पर आपकी आवाज .... जिस धरती पर जिसकी पहचान हो ,जिस धरती पर उसका नाम हो, आज वही मूल मालिक अपनी पहचान के लिए दर-दर भटक रहा है, बाहर के लोगों का उनकी संस्कृति पर हमला, इसलिए शंभू द्वीप न्यूज़ चैनल गोंडवाना की धरती पर आपका आवाज... हमें सपोर्ट करें











2 thoughts on “छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का बयान: आदिवासी धर्म और संस्कृति पर सवाल? आदिवासी सबसे बड़े हिंदू वाले बयान पर आदिवासियों का विरोध”
आदिवासी को हिंदू साबित करने से उनका आरक्षण का दावा खत्म होगा दूसरी तरफ सरकार पर धर्म कोड देने से मुक्ति मिलेगी। अगर आदिवासी खुद को हिंदू मुस्लिम या ईसाई न मानकर अपने ओरिजिनल इंडीजिनस प्रकृतिवादी या animist कोड में पहचान से उनको धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा सरकार को देना होगा। उससे बचने के लिए भाजपा सरकार आर एस एस बजरंग दल हिन्दू वाहिनी विश्व हिंदू परिषद इत्यादि के माध्यम से वही मिशन चला रही है जैसे ईसाई मिशनरी या मदरसे । अपने आदिवासी समूहों को आंख खोलने की आवश्यकता है नहीं तो हिन्दू राष्ट्र में डिटेंड कर दिए जाने का खतरा सर पर मंडरा रहा है
बहुत-बहुत धन्यवाद दादा आप लोगों की जागरूकता से ही समाज में जागरूकता बढ़ेगी हम उसे जागरूकता को फैलाने का एक अंग है हम सभी को मिलकर इस कारवां को और आगे बढ़ना होगा