रानी दुर्गावती मंडावी बलिदान दिवस पर निकाली गई रैली, वीरांगना को किया गया नमन — गोविंदपुर में उमड़ा जनसैलाब

सूरजपुर/प्रतापपुर | 24 जून 2025

 

भारत की महान वीरांगना और गोंडवाना साम्राज्य की गौरवशाली रानी दुर्गावती मंडावी की शहादत दिवस के अवसर पर ग्राम गोविंदपुर, विकासखंड प्रतापपुर, जिला सूरजपुर में बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा, भव्य रैली और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

वीरांगना रानी दुर्गावती मंडावी : गोंडवाना की शेरनी

कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12 बजे रानी दुर्गावती मंडावी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इसके पश्चात एक विशाल श्रद्धांजलि रैली निकाली गई, जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा। रैली में बड़ी संख्या में ग्रामीण, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक गोंडी वेशभूषा में शामिल हुए। रैली के दौरान हाथों में बैनर, झंडे और रानी दुर्गावती अमर रहे, आदिवासी स्वाभिमान जिंदाबाद जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस: मानी पोड़ी में गरिमामय कार्यक्रम संपन्न

मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में कहा कि रानी दुर्गावती मंडावी न केवल गोंडवाना की रानी थीं, बल्कि वे भारत की प्रथम आदिवासी महिला शासक थीं, जिन्होंने मुगलों के विरुद्ध वीरता से युद्ध करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उनका जीवन आज भी महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा है।

रानी दुर्गावती मंडावी जी का बलिदान दिवस: आदिवासी समुदाय में जागरूकता की कमी

कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविंदपुर के सरपंच रंग साय ने की। साथ ही धुमाडाड के सरपंच विकास कुमार नेटी ने भी अपनी उपस्थिति देकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। दोनों जनप्रतिनिधियों ने रानी दुर्गावती के शौर्य और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।

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कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, देशभक्ति गीत, पारंपरिक नृत्य, और गोंडी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति हुई। बच्चों और युवाओं ने ऐतिहासिक झांकियों के माध्यम से रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंगों को जीवंत किया।

श्रद्धांजलि सभा के अंत में सामूहिक नमन और मौन धारण कर रानी दुर्गावती को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। ग्रामवासियों ने कार्यक्रम को अनुशासन और समर्पण भाव से सफल बनाया।

यह आयोजन आदिवासी समाज के आत्मगौरव, इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बन गया। ग्राम गोविंदपुर ने यह सिद्ध किया कि अपनी विरासत को सहेजने का जज्बा आज भी समाज में जीवित है।

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Author: Shambhoo Dwip

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