सूरजपुर, 8 जुलाई 2024 — छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज की जिला इकाई ने आज जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें भूमाफिया गुड्डू ठाकुर उर्फ राजेन्द्र प्रसाद ठाकुर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में बताया गया कि गुड्डू ठाकुर ने आदिवासी समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और मुस्लिम समुदाय के साथ सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की। समाज के पदाधिकारियों ने ठाकुर पर आरोप लगाया कि उन्होंने भूमि क्रय-विक्रय और ब्याज पर पैसे देने के धंधे से अकूत बेनामी संपत्ति अर्जित की है, जिससे क्षेत्र के मूलवासियों को धमकाकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।बिश्रामपुर – शंभू शक्ति सेना ने नगर पंचायत के गठन को लेकर जताई आपत्ति, संविधानिक अधिकारों का हवाला**
प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार बन्छोर और जिला अध्यक्ष मोतीलाल पैकरा की अगुवाई में सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि गुड्डू ठाकुर की बेनामी संपत्तियों की जांच कर उन्हें कुर्क किया जाए और प्रभावित लोगों को न्याय दिलाया जाए।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि आदिवासी समाज ने पहले भी पुलिस और प्रशासन को इस मामले में लिखित शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सर्व आदिवासी समाज ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अनुसूचित जाति/जनजाति मंत्री, गृहमंत्री और पुलिस महानिदेशक सहित अन्य उच्च अधिकारियों को भी ज्ञापन की प्रतियां भेजी हैं, ताकि जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
समाज के महासचिव बृजमोहन सिंह गोंड ने कहा, “हमारे समुदाय के खिलाफ की गई इस अभद्रता और धमकियों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रशासन को इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
**आदिवासी समाज के सम्मान पर चोट: राकेश सांडिल की चेतावनी**

सूरजपुर – शंभू शक्ति सेना छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सांडिल ने आदिवासी समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और गालियों पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह न केवल आदिवासी समाज के सम्मान पर सीधा हमला है, बल्कि देश और प्रदेश में उच्च पदों पर बैठे आदिवासी नेताओं के प्रति भी असम्मान है।
“हमारे देश के राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री दोनों ही आदिवासी समुदाय से आते हैं। उनके समुदाय को अपमानित करना हमारे समाज के प्रति उनकी घृणित सोच को दर्शाता है,” सांडिल ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर प्रशासन ने इस मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो आदिवासी समाज उग्र आंदोलन करने पर विवश हो सकता है।
आदिवासी समाज में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है, और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। राकेश सांडिल ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाएं।
**मोतीलाल पैकरा ने मांग की: आदिवासी क्षेत्र में अकूत बेनामी संपत्ति की होनी चाहिए जांच**
छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी नेता मोतीलाल पैकरा ने हाल ही में एक गंभीर मुद्दा उठाया है, जिसमें उन्होंने अपने क्षेत्र में अकूत बेनामी संपत्ति की जांच की मांग की है। पैकरा का कहना है कि आदिवासी और मूल निवासियों को डरा-धमकाकर कुछ लोगों ने अपनी संपत्ति और आय को दुगना कर लिया है।
### बेनामी संपत्ति का मुद्दा
बेनामी संपत्ति वह संपत्ति होती है, जो किसी और के नाम पर खरीदी या पंजीकृत होती है, लेकिन असली मालिक कोई और होता है। इस तरह की संपत्ति का उपयोग अक्सर काले धन को सफेद करने, कर चोरी, और अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है। मोतीलाल पैकरा का आरोप है कि उनके क्षेत्र में कुछ प्रभावशाली लोगों ने बेनामी संपत्तियों के माध्यम से अपने धन को बढ़ाया है, जिससे आदिवासी समुदाय को भारी नुकसान हो रहा है।
### आदिवासियों की सुरक्षा और अधिकार
पैकरा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में भूमि और संसाधनों पर मूल निवासियों का अधिकार है, और इसे किसी भी प्रकार से छीनने का प्रयास अनुचित और अवैध है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग आदिवासियों को डराकर और धमकाकर उनकी जमीनें छीन रहे हैं और उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर बना रहे हैं। ऐसे मामलों की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
### प्रशासन से उम्मीदें
मोतीलाल पैकरा ने प्रशासन से अपील की है कि वह इस मामले की गंभीरता को समझें और तुरंत जांच शुरू करें। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आदिवासी समुदाय का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल इन मामलों की जांच करे, बल्कि आदिवासियों को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।
### समाज और सरकार की भूमिका
पैकरा ने समाज और सरकार से भी अपील की है कि वे आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति या समूह आदिवासियों के अधिकारों का हनन न कर सके। इसके लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की भी जरूरत है, ताकि लोग इस मुद्दे की गंभीरता को समझ सकें और इसके खिलाफ आवाज उठा सकें।
### निष्कर्ष
मोतीलाल पैकरा का यह कदम निश्चित रूप से आदिवासी समुदाय के हित में है। उनकी मांग न केवल न्यायसंगत है, बल्कि समय की भी मांग है। अगर प्रशासन और समाज मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो निश्चित ही आदिवासियों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल होगा।
“अगर पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगी, तो आदिवासी समाज कभी भी उग्र आंदोलन कर सकता है,” उन्होंने चेतावनी दी। इस मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी मचा दी है और अब यह देखना होगा कि प्रशासन किस तरह से इस समस्या का समाधान करता है।
जिला कोषाध्यक्ष कृष्णनारायण प्रताप चेरवा और मिडिया प्रभारी विजय सिंह मरपच्ची ने भी इस ज्ञापन को समर्थन दिया और कहा कि समाज के हित में यह जरूरी कदम उठाया गया है।
**जय जोहार!**
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Author: Shambhoo Dwip
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