
**हसदेव बचाओ पदयात्रा: जनसमर्थन में उमड़ा उत्साह**
*हरिहरपुर:* 25 जनवरी 2024 – हसदेव बचाओ पदयात्रा में जनसमर्थन में उमड़ा उत्साह, शंभू शक्ति सेना ने युवा टीम के साथ हसदेव बचाओ मंच से जुड़ने का ऐलान किया है।
*आज का घटनाक्रम:*
– **शंभू शक्ति सेना का वर्चुअल मीटिंग:** संध्या के समय लगभग 6:00 बजे, शंभू शक्ति सेना ने वर्चुअल मीटिंग का आयोजन किया, जिसमें सरगुजा संभाग के पदाधिकारी, कोरबा जिले के पदाधिकारी, और प्रदेश प्रमुख शामिल हुए।
– **शंभू शक्ति सेना का समर्थन:** मीटिंग के बाद, शंभू शक्ति सेना ने हसदेव बचाओ पदयात्रा का समर्थन करने का फैसला किया। उन्होंने घटना के दौरान हरिहरपुर में हसदेव बचाओ मंच में शामिल होने का ऐलान किया है।
– **पदयात्रा का कार्यक्रम:** पदयात्रा 26 जनवरी को हरिहरपुर से रवाना होगी और 7 फरवरी तक गाँवों को जाकर सड़क सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करेगी।

*जनसमर्थन और उत्साह:*
– **शंभू शक्ति सेना का अद्वितीय योगदान:** शंभू शक्ति सेना ने अपने युवा टीम के साथ मिलकर जनसमर्थन में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिससे पदयात्रा को और भी मजबूती मिलेगी।
– **उत्साहपूर्ण जनता:** घटना के दौरान उत्साहपूर्ण जनता ने हसदेव बचाओ सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन जताया और आने वाली पदयात्रा के लिए उत्साह व्यक्त किया।
*निष्कर्ष:*
हसदेव बचाओ पदयात्रा में जनसमर्थन की भरमार और शंभू शक्ति सेना के समर्थन से इस पहल की ताकत में वृद्धि हो रही है, जिससे सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर लोगों का आकर्षण बढ़ेगा।


हसदेव जंगल बचाने जनजागरण हेतु विशाल पदयात्रा 26 जनवरी से शुरू 26 जनवरी 1950 को देश में भारत का संविधान लागू हुआ है, जिसमें जल-जंगल, जमीन को बचाने की रक्षा के लिए अनेकों कानून बनाये गये है, परन्तु आज वर्तमान समय में आदिवासियों के हित में बनाये गये नियम कानूनों का जिस तरह से खुल्लेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही है यह किसी से नहीं छिपा है। हसदेव क्षेत्र पांचवी अनुसूची के अन्तर्गत आता है जहां के परसा ईस्ट केते बासेन और परसा में स्थित कोयला खदान सम्पदा को हड़पने हेतु फर्जी ग्राम सभा के माध्यम असंवैधानिक कार्य किया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा में स्थित हसदेव जंगल भारत के सबसे बड़े वन क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण जंगल है। इस जंगल में कई दुर्लभ और लुप्त होती पशु-पक्षियों एवं वनस्पतियों अपने अस्तित्व की रक्षा हेतु पुकार रही है। इसी जंगल से हसदेव नदी बहती है, जिसे छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा भी कहते है।
छत्तीसगढ़ एवं केन्द्र सरकार की मिली भगत से अडानी उद्योगपति को लाभ पहुंचाने के लिए कोयला खदान के नाम पर हसदेव जंगल में लगातार पेड़ो की कटाई जारी है। जिसका वहां के आदिवासीजन व छत्तीसगढ़ की जनता के द्वारा पेड़ो की कटाई नहीं करने की मांग की जा रही है। हसदेव जंगल केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे भारत के लिए पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। आज के समय में जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हसदेव जंगल को बचाना सभी देशप्रेमी जनता का कर्तव्य है। इसी कारण जल-जगल और जमीन की रक्षा करने के लिए “हसदेव जंगल को बचाने के लिए” 26 जनवरी 2024 को हरिहरपुर धरना स्थल से पूरे सरगुजा संभाग के गांवों को जगाने के लिए जनजागरण पदयात्रा में किया जा रहा है। जिसमें झारखण्ड से बरखा लकड़ा, महाराष्ट्र से सतीश पेदाम, गुजरात से बेलोसा बबीता कच्छप सहित देशभर के सैकड़ो लोग शामिल हो रहें हैं।
26 जनवरी को हसदेव क्षेत्र से शुरू होने वाली पदयात्रा पूरे संभाग के सैकड़ो गांवों सभी ब्लॉक-जिला मुख्यालों में रैली जनजागरण करते हुए दिनांक 15 मार्च 2024 को सरगुजा संभागीय मुख्यालय पहुंचेगी जहां पर पी.जी. कॉलेज मैदान में विशाल आम सभा के माध्यम से समापन होगी।
Author: Shambhoo Dwip
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