जांजगीर-चांपा – 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के एक छोटे से गांव बोरसी में मांझी समुदाय द्वारा यह दिवस बहुत ही उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस गांव में लगभग 20 घरों की आदिवासी मांझी समाज के लोग रहते हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 85 से 90 के बीच है, जबकि पूरे गांव की जनसंख्या लगभग 1200 है।

इस विशेष मौके पर मांझी समुदाय ने अपने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर गांव की गलियों में आदिवासी गीतों के साथ नृत्य किया। नन्हें-मुन्ने बच्चे भी इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए आदिवासी कला और संस्कृति का प्रदर्शन कर रहे थे। समुदाय के सदस्यों ने गर्व से अपनी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को साझा किया।
मांझी समुदाय की एक अनोखी विशेषता यह है कि वे अभी भी अपने पारंपरिक पहनावे और आभूषणों का उपयोग करते हैं। यहां की महिलाएं विशेष रूप से लाख की चूड़ियां पहनती हैं, जो कि इस समुदाय की पहचान है। उनके बुजुर्गों के अनुसार, पहले वे खुद अपने हाथों से लाल मिट्टी और परसा पेड़ की गोंद से लाख की चूड़ियां बनाते थे और पहनते थे। आज भी, इस परंपरा को मांझी समाज ने संजोकर रखा है, और वे बाजार से लाख की चूड़ियां खरीदकर पहनते हैं, कांच की चूड़ियों की बजाय।
इसके अलावा, मांझी समुदाय के विवाह कार्यक्रम में भी अद्वितीय रस्में देखने को मिलती हैं, जो अन्य समुदायों से भिन्न और चकित कर देने वाली होती हैं। यह समाज अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में दृढ़ है और विश्व आदिवासी दिवस पर इसे उजागर करने का मौका पाकर गर्व महसूस करता है।
Author: Shambhoo Dwip
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