*शताली शेडमाके का बीबीसी में असिस्टंट प्रोड्यूसर पद पर चयन: आदिवासी समाज की गौरवशाली उपलब्धि**

 

गोंदिया, 25 जुलाई 2024 – गोंदिया जिले की शताली शेडमाके ने इतिहास रच दिया है। बीबीसी आंतरराष्ट्रीय वृत संस्था में असिस्टंट प्रोड्यूसर पद के लिए चयनित होकर शताली ने न केवल अपने जिले बल्कि पूरे महाराष्ट्र का नाम रोशन किया है। शताली शेडमाके, गोंदिया जिले की पहली आदिवासी लड़की है जिसे यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

*शताली का बीबीसी में असिस्टंट प्रोड्यूसर पद पर चयन: आदिवासी समाज की गौरवशाली उपलब्धि**

शताली ने 25 जुलाई 2024 को बीबीसी के दिल्ली कार्यालय में अपने पद को संभाला। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि सम्पूर्ण आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है। शताली की यह सफलता इस बात का प्रतीक है कि आदिवासी समाज भी अपने कठिन परिश्रम और समर्पण से ऊँचाइयों को छू सकता है।

इस मौके पर शंभू शक्ती सेना ने शताली शेडमाके को ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं। सेना के प्रवक्ता ने कहा, “यह सफलता शताली की मेहनत और लगन का नतीजा है। हम उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि वह आदिवासी समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनेंगी।”

आदिवासी समाज के लोगों के लिए शताली की यह उपलब्धि एक मिसाल है कि अगर मेहनत और लगन से काम किया जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। शताली ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो आदिवासी समाज के युवा भी बड़ी से बड़ी सफलताएँ हासिल कर सकते हैं।

शताली और उनके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल गोंदिया जिला, बल्कि सम्पूर्ण महाराष्ट्र गर्व महसूस कर रहा है। हम आशा करते हैं कि शताली अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करें और आदिवासी समाज का नाम रोशन करती रहें।

शताली को एक बार फिर से ढेर सारी शुभकामनाएं और अभिनंदन!

**पारिवारिक पृष्ठभूमि: समाज सेवा का प्रेरणास्रोत**

शताली के माता-पिता ने हमेशा से ही सामाजिक सेवा की है और समाज के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनके पिता, सुन्हेर सिंह ताराम, आदिवासियों के लिए गोंडवाना इतिहास पर लेख लिखते थे और अपने कार्यों के माध्यम से गोंडवाना को प्रतिष्ठित किया। उनकी प्रसिद्ध मासिक पत्रिका “गोंडवाना दर्शन” आज भी लोगों को उनके द्वारा लिखे लेखों की याद दिलाती है। शताली आज उन्हीं के नक्शे कदम पर आगे बढ़ रही हैं।

शताली की माता, उषा किरण आत्राम, गोंड समुदाय में विशेष पहचान रखती हैं। वह एक समाजसेवी लेखिका और रिटायर्ड ऑफिसर हैं। इंग्लिश, गोंडी, और मराठी भाषाओं की जानकारी रखने वाली उषा किरण आत्राम कलासंगीत, लोकसाहित्य, और नृत्य में विशेष रुचि रखती हैं। वह आदिवासी, दलित, और मागासवर्गीय महिलाओं के ऊपर होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और साहित्य लेखन करने में संलग्न हैं। कविता, कहानी, लेख, और बालसाहित्य नाटक निर्मिती करना उनकी रुचि के प्रमुख क्षेत्र हैं।

शताली के माता-पिता की समाज सेवा और साहित्यिक योगदान ने शताली को प्रेरणा दी है और आज शताली उन्हीं के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए एक नई मिसाल कायम कर रही हैं। उनके इस सफलता के सफर में हम सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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