शिवनंदनपुर, विश्रामपुर ,जिला सूरजपुर,
छत्तीसगढ़ – 4 अक्टूबर 2023 को छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किया गया था, शिवनंदनपुर को नगर पंचायत घोषित करने के खिलाफ आज दिनांक 30 जून 2024 को आदिवासी समाज ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में ग्राम पंचायत शिवनंदनपुर के आदिवासी समाज ने एकमत होकर अपने पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई।

### **ग्राम सभा का निर्णय**
ग्राम सभा ने स्पष्ट किया कि उनके नॉन-ज्यूडिशरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ज्यूडिशरी व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती। इस संदर्भ में कलेक्टर के माध्यम से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़ राज्यपाल, और महामहिम राष्ट्रपति को आवेदन भेजा गया। आवेदन में कहा गया कि नगर पंचायत बनने से आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकार और व्यवस्था को खतरा हो सकता है।
### **विधानसभा चुनाव और आचार संहिता के दौरान मामला शांत**
विधानसभा चुनाव और आचार संहिता की धारा 144 लागू होने के कारण नगर पंचायत का मुद्दा शांत रहा। लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद जून महीने में नगर पंचायत बनाने की प्रक्रिया को पुनः सक्रिय किया गया, जिससे आदिवासी समाज में आक्रोश फैल गया।
### **आदिवासी समाज की चिंताएं**
आदिवासी समाज का मानना है कि नगर पंचायत बनने से उनके हक और अधिकार छीने जा रहे हैं। उनके समाज में कोई बड़े ठेकेदार या पैसे वाले लोग नहीं हैं, जिससे बाहरी लोग मुखिया या अध्यक्ष के पद पर आसीन हो सकते हैं, जो समाज के लिए उचित नहीं होगा। यह क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां आदिवासियों का शासन और प्रशासन पर नियंत्रण होता है। इसके बावजूद, उनके हाथ से आरक्षित सीटें छिनी जा रही हैं और समाज को कमजोर बनाया जा रहा है।
### **फिर से आवेदन का निर्णय**
आज की बैठक में समाज ने निर्णय लिया कि पूर्व के आवेदन पर फिर से आवेदन लगाया जाएगा। इस पर विचार करते हुए नगर पंचायत के गठन को निरस्त किया जाए।
### **नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की अधिसूचना**

छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 5 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य शासन ने शिवनंदनपुर को नगर पंचायत घोषित करने की अधिसूचना जारी की। इसके तहत ग्राम पंचायत शिवनंदनपुर की जनसंख्या (6567, वर्ष 2011) के आधार पर नगर पंचायत की सीमाएं तय की गईं।
### **संवैधानिक और कानूनी पहलू**
अनुच्छेद 13(1) और अनुच्छेद 13(3) क के तहत आदिवासी समुदाय का स्वशासन, प्रशासन और इसका नियंत्रण संवैधानिक प्रावधान है। ग्राम सभा ने सामुदायिक और सार्वजनिक हित में निर्णय लिया है कि नगर पंचायत के गठन पर रोक लगाई जाए।
### **शंभू शक्ति सेना का समर्थन**
शंभू शक्ति सेना, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सांडिल ने भी नगर पंचायत के गठन का विरोध करते हुए आवेदन दिया है। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में नगरीय निकायों के गठन को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
**निष्कर्ष**
आदिवासी समाज का यह आंदोलन उनके अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। नगर पंचायत का गठन उनके पारंपरिक शासन और प्रशासन पर प्रभाव डाल सकता है, और इसे रोकने के लिए उनका संघर्ष जारी है। यह मामला संवेदनशील है और इसके समाधान के लिए संवैधानिक प्रावधानों और आदिवासी समाज के अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक है।
रिपोर्टर – राकेश सांडिल ✒️ से
Author: Shambhoo Dwip
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