कांकेर छत्तीसगढ़ – पर्वतारोही हासपेन बंशीलाल नेताम के प्रथम जयंती पर कोया बुक बैंक का शुभारंभ**

*पर्वतारोही हासपेन बंशीलाल नेताम के प्रथम जयंती पर कोया बुक बैंक का शुभारंभ*

गोटुल स्पोर्ट्स एकेडमी के मुख्य कोच, पर्वतारोही, राईडर, एथलीट्स तिरु. हासपेन बंसीलाल नेताम के प्रथम जयंती पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन ग्राम कानापोंड में आज दोपहर को किया गया, सभा में अतिथि के रूप में मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित तिरूमाल अजय मंडावी जी, कमला नेताम जी हासपेन बंशीलाल नेताम की मां, मनत नेताम हासपेन बंशीलाल नेताम की सुपुत्री, जगमोहन वट्टी सर रिटायर्ड आईजी, अविनाश ठाकुर डीएसपी, गिरिजा साव डीएसपी,

डॉ. मोखलेंन्द्र प्रताप सिंह डीएसपी, अश्वनी कांगे सेनापति केबीकेएस, राहुल गुप्ता मांउटेनर, राकेश राजपूत स्वास्थ्य विभाग की उपस्थिति में श्रद्धांजलि दी गई एवं उनके योगदान को याद किया गया और कोया बुक बैंक का शुभारंभ भी किया गया। श्रद्धांजलि सभा में रोजी गावड़े ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए हासपेन बंशीलाल नेताम जी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि

 

*बंशी नेताम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है नाम*

 

वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी हास पेन बंशीलाल नेताम जी साल 2003 में खेलदूत के रूप में पूरे भारत का भ्रमण किऐ थे . साल 2018 में साइकिलिंग करते हुए उन्होंने चारों महानगरों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज जिसकी दूरी 6000 किलोमीटर है, उसे 16 दिन 16 घंटे के रिकॉर्ड समय में पूरा कर अपना नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने में सफल हुए …उनका यह रिकॉर्ड अभी भी सुरक्षित है. वहीं, उन्होंने साल 2018 में ही खेल क्षेत्र के अध्यन के लिए शांतिदूत के रूप में पूरे भारत की 29000 हजार किलोमीटर की लंबी यात्रा बुलेट से तय की थी।

 

*एवरेस्ट फतह करना था लक्ष्य* 

 

पर्वतारोहण का शौक रखने वाले बंशी लाल नेताम दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर बस्तर अंचल के युवतियों को पहुचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे थे उन्होंने पीछले सत्र में इंडियन माउंटेन फेडरेशन से माध्यम से अपनी प्रशिक्षित तीन आदिवासी युवतियों के साथ कुन पर्वत और इंद्रासन पर्वत चोटी फतह करने में सफलता हासिल किऐ थे इस वर्ष माउंट एवरेस्ट (8850 मीटर) फतह कर वहाँ से कन्याकुमारी तक सायकल जारूकता रैली करना चाह रहे थे परंतु दुर्घटना वंश दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से लक्ष्य के एकदम करीब 8300 मीटर पर ही मिशन रोकना पड़ गया उनकी सोच थी कि पहली बार बस्तर कि आदिवासी बेटियां एवरेस्ट फतह करे पिछले ओलंपिक खेलों में स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग को भी शामिल किया गया है जो कि पर्वतारोहण तकनीक पर ही आधारित होता है इस लिए बंशीलाल नेताम जी का सपना था कि बस्तर की बेटियां ही इस खेल के माध्यम से देश के लिए गोल्ड मेडल लाऐगीं इस मिशन के लिए उन्होंने 50 से अधिक युवतियों को पर्वतारोहण व स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग के लिए प्रशिक्षित कर रहे थे।

 

*गोटुल स्पोर्ट्स एकेडमी के रूप में 15 से अधिक जगहों पर निशुल्क प्रशिक्षण केन्द्र*

 

बंशीलाल नेताम जी का मानना था कि गाँव के बच्चों में असीम ऊर्जा भरी होती है परंतु खाली रहने से वे नशापान जैसे कुरुतियो के ओर अग्रसर हो कर बर्बाद हो जाते हैं इसके लिए उन्होंने गाँव के युवाओं को कड़ी प्रशिक्षण देकर उनको शारीरिक मानसिक रूप से मज़बूत बनाकर उनके ऊर्जा को खेल व खेल से जुड़े रोजगार की ओर प्रवृत होने के लिए मजबूर कर दिये . आज उनके द्वारा प्रशिक्षित हजारों बच्चे सैन्य बलों में चयनित होकर नौकरी कर रहे हैं सैकड़ों बच्चे नेशनल स्तर पर अपने प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं एथेलेटिक्स में कुछ बच्चों का प्रदर्शन राष्ट्रीय रिकॉर्ड के आसपास आ गया है वे अभी राष्ट्रीय खेल अकादमी में रहकर गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं *एक लड़की का चयन उड़न परी पीटी ऊषा खेल एकेडमी के लिए भी हुआ है,* उम्मीद है आपके द्वारा प्रशिक्षित ये युवा भविष्य में आपका और देश का नाम जरूर रौशन करेंगे।

 

*2006 से पुलिस विभाग में पदस्थ*

 

खेल के प्रति रुचि रखने वाले बंशीलाल नेताम पुलिस की साल 2006 में पुलिस विभाग में बतौर PTI के पद पर बीजापुर में उनकी पहली पोस्टिंग हुई. साल 2019 में बीजापुर से कांकेर ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने अपने सपनो को रंग देने की सोची. उन्होंने जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर निःशुल्क गोटुल एकेडमी की शुरुआत की. पैसों की कमी बाधा बनने लगी तो प्रकृति को अपना औजार बनाया और प्रशिक्षण देना शुरु किया था। उन्होंने एक अलग ही नयी टेक्निक इजाद की थी जो कि हजारों साल पुरानी पारम्परिक गोटुल व आधुनिक खेल तकनीक से मिलकर बनी थी जिसे वे कोयतोरियन तकनीक कहा करते थे जिसमें वे गाँव में उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल से ही खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण उपकरण तैयार कर देते थे ।

 

*समाज सेवा करने का जूनून*

 

बंशीलाल नेताम जी पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियों में लगे हुए थे वे और उनके प्रशिक्षार्थी कोया ब्लड बैंक के रूप में जरूरतमंदों को हमेशा रक्तदान करते रहते थे उन्होंने तेजी से लुप्त होती अपनी मातृभाषा गोंडी को बचाने के लिए गोंडी भाषा को भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल कराना चाहते थे इसके लिए वे एवरेस्ट से कन्याकुमारी तक सायकल जारूकता यात्रा आयोजित करने वाले भी थे वे नशामुक्ति के लिए बहुत ही मुखर थे वे गाँव गाँव घुमकर हजारों युवाओं को नशामुक्ति कराने में सफल रहे।

 

*कोया बुक बैंक की स्थापना*

हासपेन बंशीलाल नेताम जी के प्रथम जंयती पर कोया बुक बैंक की स्थापना ग्राम ईमलीपारा, खैरखेडा़ में हासपेन बंशीलाल नेताम जी की मां एवं पद्मश्री अजय मंडावी जी के कर कमलों से किया गया।

 

इस अवसर पर तिरूमाल हरिचंद कांगे, संदीप सलाम, डॉ. सनत नेताम, कृष्णा शोरी, मोहन जुर्री, दुखेश नेताम, कमलेश कोमरा, अजय जुर्री, विष्णु राम हुर्रा, सखाराम भास्कर, जगलूराम, राधेश्याम भास्कर, बृजलाल भास्कर, दरबारी राम, दिनेश हिडको, परानसिंह नेताम, रिया कुंजाम एवं गोटुल स्पोर्ट्स एकेडमी कानापोंड के बच्चे एवं उनके माता पिता और ग्रामवासियों का उपस्थित रहा।

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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