“जल-जंगल-जमीन पर कॉर्पोरेट कब्ज़ा नहीं चलेगा – किसानों का प्रदेशव्यापी विद्रोह”

 


“अडानी भगाओ – छत्तीसगढ़ बचाओ” के नारों से गूंजा प्रदेश, संयुक्त किसान मोर्चा ने मनाया कॉर्पोरेट विरोधी दिवस
रायपुर, 13 अगस्त 2025

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के देशव्यापी आह्वान पर बुधवार को छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया गया। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक, किसान संगठनों ने सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किया, रैलियाँ निकालीं और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र व राज्य सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों का विरोध किया।

मोर्चा के नेताओं ने इस दिन को भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए कहा कि आज के समय में देश को विदेशी पूंजी, बड़े कॉर्पोरेट घरानों और संसाधनों की लूट से बचाना उतना ही जरूरी है जितना उस दौर में अंग्रेज़ी साम्राज्य से मुक्ति। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ को अडानी समूह की खुली लूट का केंद्र बना दिया गया है, जहाँ पेसा कानून, वनाधिकार अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज करते हुए जल, जंगल, जमीन का विनाश किया जा रहा है।

प्रदेशभर में हुआ विरोध
कॉर्पोरेट विरोधी दिवस के तहत—

  • भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गरियाबंद, दुर्ग, जगदलपुर, बीजापुर और नारायणपुर में प्रदर्शन किया।
  • अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान संगठन और आदिवासी भारत महासभा ने मैनपुर में मोर्चा संभाला।
  • छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने दल्ली राजहरा और बालोद में आंदोलन किया।
  • जिला किसान संघ ने राजनांदगांव में प्रदर्शन किया।
  • छत्तीसगढ़ किसान महासभा ने रायपुर में विरोध रैली निकाली।
  • हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने हसदेव क्षेत्र में आवाज बुलंद की।
  • छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने कोरबा के कुसमुंडा और सरगुजा के लुण्ड्रा में विरोध जताया।

इन आंदोलनों का नेतृत्व तेजराम विद्रोही, प्रवीण श्योकंद, नरोत्तम शर्मा, सौरा यादव, भीमसेन मरकाम, युवराज नेताम, जनकलाल ठाकुर, रमाकांत बंजारे, सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू, सोमेंद्र सिंह, दामोदर श्याम और ऋषि गुप्ता सहित कई किसान नेताओं ने किया।

मुख्य मांगें और विरोध के मुद्दे
राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापनों में किसानों ने निम्नलिखित मांगें और आपत्तियाँ दर्ज कीं—

  • अमेरिका के साथ हुए कृषि समझौते और भारत पर थोपे गए 50% टैरिफ का विरोध।
  • राष्ट्रीय सहकारी नीति को किसानों के लिए हानिकारक बताते हुए इसका विरोध।
  • लाभकारी समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी की गारंटी।
  • किसानों के सभी ऋणों की माफी और सभी वृद्ध किसानों को ₹10,000 मासिक पेंशन।
  • स्मार्ट मीटर और बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध।
  • कॉर्पोरेट खनन और आदिवासियों के जबरन विस्थापन पर रोक।

सरकार को चेतावनी
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी नीतियों के चलते आम जनता और किसान समुदाय के तीखे विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में किसानों और आदिवासियों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।

(रिपोर्ट : संयुक्त किसान मोर्चा, छत्तीसगढ़ | संपर्क : संजय पराते, 94242-31650)


 

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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