रायपुर, 10 अगस्त 2025 – विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की चुप्पी ने प्रदेश के आदिवासी समाज में गुस्से की लहर दौड़ा दी है। आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले मुख्यमंत्री ने न तो सोशल मीडिया पर शुभकामना संदेश दिया, न ही किसी नई योजना की घोषणा की।
सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के सूरजपुर जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने इस चुप्पी को “आदिवासी समुदाय का सीधा अपमान” करार दिया। उन्होंने कहा,
“सुबह से रात 11 बजे तक मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल देखता रहा… पर न शुभकामना, न योजना। 35% आदिवासी आबादी के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं।”
संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त दिवस की अनदेखी
1994 से संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस दुनिया के 193 देशों में आदिवासी अधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़, जहां लगभग 35% आबादी आदिवासी है, वहां इस दिन की अनदेखी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
“नाम मात्र के आदिवासी मुख्यमंत्री” – पोया
बीपीएस पोया ने आरोप लगाया कि आदिवासी मुख्यमंत्री की नियुक्ति केवल “नाम मात्र” की थी। उन्होंने सवाल उठाया –
“दूसरे राज्यों की धार्मिक गतिविधियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाले मुख्यमंत्री को अपने ही समाज के सबसे बड़े दिन की खबर नहीं थी, या जानबूझकर चुप रहे?”
चेतावनी और मांग
पोया ने चेतावनी दी कि अगर यह रवैया जारी रहा तो आदिवासी समाज राजनीतिक जवाब देगा। उन्होंने मांग की कि सीएम आदिवासी संस्कृति, अधिकारों और विकास को प्राथमिकता दें, अन्यथा पद छोड़ दें।
सरकार से अपील
सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने मांग की है कि सरकार विश्व आदिवासी दिवस जैसे अवसरों पर सक्रिय भागीदारी दिखाए, और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं लागू करे। साथ ही, जनगणना में आदिवासी पहचान के लिए अलग कॉलम और धर्म कोड की भी मांग दोहराई गई।
Author: Shambhoo Dwip
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