आदिवासी युवक के साथ अमानवीय अत्याचार: जातीय अपमान, मारपीट, अपहरण और मूत्रपान कराने का आरोप, न्याय की मांग को लेकर समाज सड़क पर उतरा
📍 स्थान – तुईयापानी, तहसील हर्रई, जिला छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश)
📅 तारीख 29 जून – 5 जुलाई 2025
🖋 रिपोर्ट: शंभूद्वीप संवाददाता
### घटना की पृष्ठभूमि
छिंदवाड़ा जिले के हर्रई तहसील अंतर्गत ग्राम तुईयापानी निवासी राजकुमार बट्टी, उम्र 26 वर्ष, गोंड जनजाति से संबंधित युवक, अपने छोटे से परिवार के साथ चाय-नाश्ते की दुकान चलाकर जीवन यापन कर रहा था। 29 जून की रात को वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ घर पर था, जब अचानक राजा पिता रामे सिंह (निवासी बोहरी बाजार) अपने साथियों के साथ उसके घर में घुस आया।

### बर्बर हमला और जातीय अपमान
➡️ हमलावरों ने पूरे परिवार को जातिसूचक गालियाँ दीं, जान से मारने की धमकियाँ दीं और लोहे की रॉड तथा डंडों से पीटते हुए बाहर खींच लिया।
➡️ राजकुमार को घसीटते हुए विभिन्न घरों और स्थानों पर घुमाया गया, आफत बट्टी नामक युवक को ढूंढ़ते हुए।
➡️ मारपीट करते हुए उसे एक सुनसान स्थान पर ले जाकर न सिर्फ गुटखा थूकने पर मजबूर किया गया बल्कि उसके मुंह में मूत्रपान भी कराया गया।

यह अत्याचार केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक अपमान की पराकाष्ठा है।
### पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
📍 30 जून को थाना हर्रई में रिपोर्ट दर्ज करने पहुंचे पीड़ित को शुरुआत में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

➡️ दबाव के बाद FIR दर्ज की गई, लेकिन उसमें घटना के कई अहम पहलू छिपा दिए गए और पीड़ित को रिपोर्ट की प्रति तक नहीं सौंपी गई।
➡️ धारा 296, 115(2), 351(3)(5) BNS व SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(घ), 3(1)(ध), 3(2)(va) लगाई गईं, लेकिन कार्रवाई केवल दिखावटी रही।
➡️ मुख्य आरोपी राजा सिंह ढाबा चलाता रहा और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
### सामाजिक प्रतिक्रिया: धरना, विरोध और ज्ञापन सौंपा गया
📅 1 जुलाई को गांव के वरिष्ठ नागरिकों और पीड़ित परिवार ने विरोध स्वरूप हर्रई-नरसिंहपुर मार्ग पर धरना दिया।
➡️ इसके बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो 5 जुलाई को पीड़ित परिवार, गोंडवाना समाज, सामाजिक संगठनों व सैकड़ों ग्रामीणों ने हर्रई मुख्यालय में एकत्र होकर तहसीलदार और SDM को ज्ञापन सौंपा।

### ज्ञापन में मांगी गई प्रमुख कार्रवाइयां
1. FIR में सभी तथ्यों को जोड़ते हुए दोबारा रिपोर्ट दर्ज की जाए।
2. मुख्य आरोपी राजा सिंह सहित अन्य सभी हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
3. पुलिस की लापरवाही और पक्षपात के लिए जिम्मेदार अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
4. पीड़ित परिवार को राज्य सरकार से आर्थिक सहायता, सुरक्षा और मानसिक परामर्श मिले।
5. घटना की निष्पक्ष जांच न्यायिक या SIT के माध्यम से करवाई जाए।
### समाज में रोष, प्रशासन से जवाबदेही की मांग
गोंडवाना समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता पर हमला है। यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन जिले से प्रदेश स्तर पर फैलेगा।
### निष्कर्ष
राजकुमार बट्टी की आपबीती, न केवल एक सामाजिक अपराध है बल्कि यह पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गहरा सवाल है। क्या अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक साधारण मजदूर को न्याय मिलेगा? या यह मामला भी सत्ता और रसूख के दबाव में दबा दिया जाएगा?
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Author: Shambhoo Dwip
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