### आदिवासियों के धर्म पर विवाद: क्या आदिवासी हिन्दू हैं?

 

लेख…

भारत में अनुसूचित आदिवासी समूहों की संख्या 700 से अधिक है। ऐतिहासिक रूप से 1871 से 1941 तक हुई जनगणनाओं में आदिवासियों को अन्य धर्मों से अलग गिना गया। 1871 में ऐबरजिनस, 1881 और 1891 में ऐबरजिनल, 1901 और 1911 में एनिमिस्ट, 1921 में प्रिमिटिव, और 1931 व 1941 में ट्राइबल रिलिजन के नामों से इन्हें वर्णित किया गया। लेकिन आजाद भारत में 1951 की जनगणना के बाद से आदिवासियों को अलग से गिनना बंद कर दिया गया।

**प्रमुख बिंदु:**
1. **ऐतिहासिक जनगणना विवरण:**
– 1871: ऐबरजिनस (मूलनिवासी)
– 1881 और 1891: ऐबरजिनल (आदिम जनजाति)
– 1901 और 1911: एनिमिस्ट (जीववादी)
– 1921: प्रिमिटिव (आदिम)
– 1931 और 1941: ट्राइबल रिलिजन (जनजातीय धर्म)

2. **जनगणना के आंकड़े:**
– 1951: आदिवासी जनसंख्या 9,91,11,498
– 2001: आदिवासी जनसंख्या 12,43,26,240, जो देश की जनसंख्या का 8.2% है।

3. **आधुनिक स्थिति:**
– केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, देश के 30 राज्यों में कुल 705 जनजातियां रहती हैं।
– झारखंड में 86 लाख से अधिक आदिवासी निवास करते हैं।

### आदिवासी रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताएं

आदिवासी लोग अपने पर्व-त्योहारों का पालन करते हैं, जो पूरी तरह प्रकृति आधारित हैं और किसी भी धर्म के साथ सीधा संबंध नहीं रखते। वे अपने आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार शादी-विवाह करते हैं और उनकी प्रथागत जनजातीय आस्था के अनुसार जीवन जीते हैं। आदिवासी समाज में विवाह और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में विशेषाधिकार बनाए रखते हैं।

**प्रमुख बिंदु:**
1. **प्राकृतिक पर्व-त्योहार:**
– पर्व-त्योहारों का पालन प्रकृति आधारित है।
– हिन्दू धर्म से सीधा संबंध नहीं है।

2. **विवाह और उत्तराधिकार:**
– आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार शादी-विवाह।
– प्रथागत जनजातीय आस्था के अनुसार विशेषाधिकार बनाए रखना।

### आदिवासी समाज पर कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण

भारत में आदिवासियों को दो वर्गों में अधिसूचित किया गया है: अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित आदिम जनजाति। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2(2) के अनुसार, अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर यह अधिनियम लागू नहीं होता, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आदिवासी हिन्दू नहीं माने जाते।

**प्रमुख बिंदु:**
1. **कानूनी मान्यता:**
– अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित आदिम जनजाति के रूप में अधिसूचित।
– हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2(2) के तहत लागू नहीं होता।

### नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की राय

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कांफ्रेंस में कहा था कि आदिवासी कभी भी हिन्दू नहीं थे, न हैं। इस बयान के बाद हिन्दूवादी संगठनों की प्रतिक्रिया आक्रामक रही। कई आदिवासी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आदिवासी समाज हिन्दू धर्म से अलग है।

**प्रमुख बिंदु:**
1. **मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान:**
– आदिवासी कभी हिन्दू नहीं थे, न हैं।
– आदिवासी प्रकृति पूजक हैं।

2. **आदिवासी नेता और कार्यकर्ताओं की राय:**
– आदिवासी मूर्ति पूजक नहीं, प्रकृति पूजक हैं।
– आदिवासी समाज में ऊंच-नीच की कोई सोच नहीं है।
– आदिवासी समाज की पूजा-पद्धति, रीति-रिवाज और जीवन शैली हिन्दुओं से अलग हैं।

### आदिवासी धर्म कोड की मांग

आदिवासी समुदाय 2021 की जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की मांग कर रहा है। आदिवासी समाज का कहना है कि उनकी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक है।

**प्रमुख बिंदु:**
1. **आदिवासी धर्म कोड की मांग:**
– 2021 की जनगणना में आदिवासी धर्म कोड शामिल करने की मांग।
– संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने की आवश्यकता।

2. **आदिवासी नेताओं का दृष्टिकोण:**
– जल, जमीन, जंगल और पहाड़ों से जुड़े उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी।
– सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता।

### निष्कर्ष

आदिवासी समुदाय के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताएं, रीति-रिवाज और जीवन शैली हिन्दू धर्म से पूरी तरह अलग हैं। आदिवासी समाज अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए 2021 की जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की मांग कर रहा है।

**प्रमुख बिंदु:**
1. **आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताएं और रीति-रिवाज हिन्दू धर्म से अलग हैं।**
2. **2021 की जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की मांग।**
3. **संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने की आवश्यकता।**
4. **जल, जमीन, जंगल और पहाड़ों से जुड़े अधिकारों की रक्षा।**

इस प्रकार, आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों को बनाए रखने के लिए उनकी मांग और दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है। आदिवासी समाज का इतिहास, संस्कृति और जीवन शैली उनके धर्म और धार्मिक मान्यताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं, जो हिन्दू धर्म से अलग हैं।

संलग्न रिपोर्टर:-  राकेश सांडिल

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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