*गंजाम (ओडिशा), 24 जून 2025:*
एक ओर जहाँ **24 जून 2025 को पूरे भारतवर्ष में गोंडवाना की महारानी दुर्गावती मंडावी जी का 461वाँ बलिदान दिवस** श्रद्धा व सम्मान के साथ मनाया गया, वहाँ देश की सत्तारूढ़ और विपक्षी सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ गोंड समाज के लाखों लोगों ने वीरांगना रानी के आत्मबलिदान को याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

लेकिन इसी दिन ओडिशा के गंजाम ज़िले से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने **मानवता और सामाजिक न्याय को शर्मसार कर दिया**। यह सिर्फ एक विरोधाभास नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि जहाँ एक ओर आदिवासी/बहुजन समाज की शौर्यगाथा को स्मरण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी समाज के लोगों को जातीय हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है।
### 📌 *क्या हुआ घटना में?*
दो दलित व्यक्ति अपनी बेटी की शादी के लिए मेहनत की कमाई से तीन गायें खरीदकर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें कथित ‘गौ-रक्षकों’ ने रोक लिया और उन पर गौ-तस्करी का झूठा आरोप लगाया। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह दिल दहला देने वाला है:
* दोनों का आधा सिर जबरन मुंडवा दिया गया,
* करीब **दो किलोमीटर तक घुटनों के बल रेंगने** के लिए मजबूर किया गया,
* उन्हें **मवेशियों का चारा खाने और नाली का गंदा पानी पीने** के लिए मजबूर किया गया,
* 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई, जो न देने पर उन्हें जानवरों की तरह पीटा गया।
### 🩸 *जातिवादी नफ़रत की एक और मिसाल*
यह घटना महज़ ‘गौ-रक्षा’ का मामला नहीं है, बल्कि सुनियोजित जातीय हिंसा का उदाहरण है। यह उसी भीड़तंत्र की कड़ी है जिसने मोहम्मद अख़लाक, पहलू ख़ान, जुनैद और अन्य को निशाना बनाया — और अब दलित समुदाय को भी नहीं बख्शा जा रहा है।
‘गौ-रक्षा’ का नाम लेकर बहुजन समाज को डराने, अपमानित करने और कुचलने का यह सिलसिला अब खुलेआम जारी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हिंसा अब धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक व जातीय उत्पीड़न का साधन बन गई है।
### 🔴 *हमारी मांगें:*
हम ओडिशा सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से तत्काल कार्रवाई की माँग करते हैं:
1. **दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी** हो और उन पर **SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम** के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
2. **पीड़ितों को सरकारी सुरक्षा, न्यायिक सहायता** और **उचित मुआवज़ा** दिया जाए।
3. **राज्य सरकार और NHRC इस मामले का स्वतः संज्ञान** लें और विशेष जांच कराएं।
### 📣 *समाज को चुनना होगा — चुप्पी या इंसाफ़*
जहाँ एक ओर रानी दुर्गावती जैसे आदिवासी नायकों को सम्मानित किया जा रहा है, वहीं अगर बहुजन समाज के वर्तमान नागरिकों को अपमानित व उत्पीड़ित किया जाता है, तो यह शौर्यगाथा मात्र औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
अब वक्त है – चुप्पी तोड़ने का, अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े होने का।
Author: Shambhoo Dwip
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