गोंडवाना समाज 84 परगना वार्षिक उत्सव: पारंपरिक आदिवासी संस्कृति का उत्सव

गोंडवाना समाज के 84 परगना का वार्षिक उत्सव छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के “छोटे डोंगर” में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन न केवल एक समारोह था, बल्कि गोंडवाना की “पारंपरिक धरोहर (पेन संस्कृति)” को पुनर्जीवित करने और सामूहिक एकता का प्रतीक था।

“पारंपरिक स्वागत की परंपरा”
इस कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत “पेन स्थलों (गोंडवाना देव स्थलों)” पर जाकर किया गया। “पेन पुरखा” (पारंपरिक पूर्वजों के प्रतीक) को पूजा अर्पित कर अतिथियों को मंच तक लाने की यह परंपरा आदिवासी समाज की गहरी सांस्कृतिक भावना को दर्शाती है।
“रीलो पाटा”, “मांदरी”, और “ढोल” की थाप पर स्वागत करते हुए पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। यह संगीत और नृत्य समाज के सामूहिक जुड़ाव और पेन पुरखाओं से आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अद्भुत दृश्य था।
“गोंडवाना के पेन स्थलों का महत्व”
पेन स्थल गोंडवाना समाज की आत्मा हैं। ये स्थल न केवल पूजा का स्थान हैं, बल्कि समाज को एकता के सूत्र में बांधने और पूर्वजों की परंपराओं को संरक्षित रखने का स्थान भी हैं।
“. गोंडी भाषा और मोती रावण कंकाली जी का योगदान”
“रघुवीर सिंह मार्को” ने गोंडी भाषा में भाषण देते हुए गोंडवाना के महानायक **मोती रावण कंकाली जी** के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि गोंडी भाषा केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह समाज की पहचान, इतिहास और सभ्यता का मूल आधार है।
“गोंडी भाषा की प्राचीनता”
मार्को जी ने बताया कि गोंडी भाषा विश्व की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। गोंडी समाज की इस प्राचीन भाषा में एक उद्धरण है:
“तमवेडची आसी रेकवेडची किम्ट!”
(अर्थ: स्वयं प्रकाशित होकर औरों को प्रकाशित करें।)
यह उद्धरण इस बात का प्रमाण है कि गोंडवाना समाज का दर्शन ज्ञान और सेवा पर आधारित है।
“मोती रावण कंकाली जी का योगदान”
मोती रावण कंकाली जी ने गोंडी सभ्यता को संरक्षित करने के लिए **गोटूल परंपरा** को मजबूत किया। गोटूल, आदिवासी समाज का पहला शैक्षिक संस्थान, समाज के युवाओं को ज्ञान, संस्कृति और नेतृत्व का पाठ पढ़ाता था।
आदिवासी समाज एवं गैर सामाजिक लोगों से मेरा विनम्र निवेदन है कि अपने लेख में हमारे गोटूल को गोटूल ही लिखा जाए घोटूल नहीं – राकेश सांडिल जी के द्वारा विशेष निवेदन
“गोंडी भाषा दिवस और पखवाड़ा”
मार्को जी ने सुझाव दिया कि “2 फरवरी को गोंडी भाषा दिवस” के रूप में मनाते हुए आएं पर इसे और धुमधाम से बनाया जाए और गोंडी पखवाड़ा सप्ताह का आयोजन हो रहा। सभी को गोंडी बोलचाल को प्राथमिकता देनी होगी यह आदिवासी समाज के लिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से पाने का एक कदम है।
” धर्म की परिभाषा और आदिवासी दृष्टिकोण”
मार्को जी ने धर्म की परिभाषा को तर्कपूर्ण और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया। उन्होंने धर्म को आदिवासी जीवन के संदर्भ में परिभाषित किया।
“धर्म और पेट का रिश्ता”
उन्होंने कहा:
**”जब पेट में रहेगा राशन, तभी होगा भाषण।”**
यह उद्धरण समाज के लिए एक गहरा संदेश है कि बिना बुनियादी जरूरतों को पूरा किए, किसी भी विचारधारा को लागू करना मुश्किल है।
“आदिवासी धर्म और पेन संस्कृति”
आदिवासी धर्म का मूल विचार है **पेन पुरखाओं और प्रकृति की पूजा।** यह धर्म मानव और प्रकृति के बीच संतुलन को बनाए रखने का संदेश देता है। मार्को जी ने कहा कि धर्म का उद्देश्य है सबको जोड़ना, न कि विभाजित करना।
“शंभू शक्ति सेना और सामाजिक सुधार”
*शंभू शक्ति सेना* द्वारा चलाए जा रहे “नशा मुक्ति अभियान” और जातीय भेदभाव मिटाने के प्रयास समाज में एक नई ऊर्जा ला रहे हैं।
“शंभू के 4 शपथ”
मार्को जी ने बताया कि अब तक 12,000 से अधिक लोगों ने शंभू शक्ति सेना के तहत चार शपथ लिए हैं। ये शपथ हैं:
1. नशा मुक्त जीवन।
2. जातीय भेदभाव का अंत।
3. सामाजिक एकता।
4. गोंडवाना संस्कृति का संरक्षण।
“नशा मुक्ति अभियान”
इस अभियान के तहत अब तक हजारों परिवारों को नशे से बचाया गया है। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए यह अभियान एक बड़ा कदम है।

“जातीय भेदभाव का अंत”
गोंडवाना समाज के विभिन्न समुदायों को एकजुट करने के लिए शंभू शक्ति सेवा का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि समाज को जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
“कोया करसाड़ कार्यक्रम: सामूहिकता का संदेश”
20 जनवरी 2025 को दंतेवाड़ा के **कोया करसाड़** कार्यक्रम में रघुवीर सिंह मार्को ने आदिवासी समाज की एकता और सामूहिकता पर जोर दिया।
“कोया कुटमा परिवार की भूमिका”
मार्को जी ने **कोया कुटमा परिवार** के युवा प्रभाग को गोंडी भाषा में शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि समाज की उन्नति के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
“पेन स्थलों की एकता”
मार्को जी ने पेन स्थलों को एक करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह पहल समाज को जोड़ने और पारंपरिक परंपराओं को मजबूत करने का माध्यम है।
“पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुति”
कार्यक्रम में प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य और संगीत ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक गहराई को उजागर किया। यह आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और युवाओं को प्रेरित करने का एक प्रयास था।
“6. गोंडवाना समाज का ऐतिहासिक योगदान”
मार्को जी ने गोंडवाना समाज की प्राचीनता और इसके ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि:
1. **गोंडी भाषा** विश्व की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है।
2. **गोटूल परंपरा** आदिवासी समाज का पहला विश्वविद्यालय था।
3. **पेन स्थल** गोंडवाना समाज की आत्मा हैं।
“विश्व के लिए संदेश”
मार्को जी ने कहा, “आज पूरा विश्व आदिवासी समाज पर शोध कर रहा है। हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी सभ्यता ने दुनिया को सिखाया कि कैसे प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाया जाए।”
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निष्कर्ष:
यह आयोजन गोंडवाना समाज के लिए न केवल एक उत्सव था, बल्कि यह समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का एक अवसर भी था।
Author: Shambhoo Dwip
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