## उत्तर बंगाल ट्रेन हादसा: कंचनजंगा एक्सप्रेस की मालगाड़ी से भयानक टक्कर, 15 की मौत, 60 घायल!

### उत्तर बंगाल ट्रेन हादसा: कंचनजंगा एक्सप्रेस की मालगाड़ी से भयानक टक्कर, 15 की मौत, 60 घायल!

 

उत्तर बंगाल के रंगपानी रेलवे स्टेशन के पास आज सुबह कंचनजंगा एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी की जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और करीब 60 यात्री घायल हो गए। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना में मालगाड़ी के लोकोपायलट, सहायक लोकोपायलट समेत तीन रेलकर्मी भी अपनी जान गंवा बैठे।

Twitter  hansraj meena – मैं ना यात्रियों की सुरक्षा कर पा रहा हूं। ना रेलगाड़ियों को सुरक्षित रख पा रहा हूं। ना रेलवे में रिक्त 3लाख पदों को भर पा रहा हूं। ना बुलेट ट्रेन धरातल पर ला पा रहा हूं। मैं केवल ड्रोन से रील बनाकर अच्छे से एडिट करके सोशल मीडिया पर वीडियो डाल सकता हूं। #अश्विनी_वैष्णव_इस्तीफा_दो

मैं ना यात्रियों की सुरक्षा कर पा रहा हूं। ना रेलगाड़ियों को सुरक्षित रख पा रहा हूं। ना रेलवे में रिक्त 3लाख पदों को भर पा रहा हूं। ना बुलेट ट्रेन धरातल पर ला पा रहा हूं। मैं केवल ड्रोन से रील बनाकर अच्छे से एडिट करके सोशल मीडिया पर वीडियो डाल सकता हूं। #अश्विनी_वैष्णव_इस्तीफा_दो

#### **रेलवे की सुरक्षा पर सवालिया निशान!**

यह हादसा एक बार फिर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। केंद्र सरकार और भारतीय रेलवे की लापरवाही के चलते लोगों की जान पर बन आई है। हादसे के बाद घटनास्थल पर हाहाकार मच गया और राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे लोगों के चेहरों पर डर और दुख साफ झलक रहा था।

मोदी सरकार में हुए बड़े रेल हादसा

#### **क्या कहती है केंद्रीय कमेटी?**

 

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की केंद्रीय कमेटी ने इस दर्दनाक घटना के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कमेटी का कहना है कि सरकार को मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देना चाहिए और सभी घायलों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

 

#### **बालासोर की त्रासदी का दर्द अब तक ताजा**

 

लगभग एक साल पहले ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना में 296 लोगों की मौत और 1100 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। तब भी रेलवे की सुरक्षा पर सवाल उठे थे, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

 

#### **’कवच’ तकनीक का अधूरा कार्यान्वयन!**

 

हर दुर्घटना के बाद सरकार द्वारा प्रचारित ‘कवच’ तकनीक अभी भी अधिकांश रेलवे नेटवर्क में लागू नहीं की गई है। रेलवे का सुरक्षा तंत्र और आधुनिकीकरण भी उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।

 

#### **क्या यह लापरवाही का नतीजा है?**

 

रेलवे सुरक्षा आयोग (सीआरएस) ने रेलवे में सुरक्षा की कमियों की पहचान की थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को गंभीरता से नहीं लिया गया। ‘व्यवसाय करने में सुगमता’ के नाम पर सीआरएस के अधिकारों में कटौती की जा रही है, जबकि रेलवे का निजीकरण और ठेकेदारी तेजी से बढ़ रही है और रेल कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है।

 

#### **तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा की मांग**

 

केंद्रीय कमेटी ने रेल सुरक्षा पर तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा और ठोस कार्यान्वयन की मांग की है। साथ ही ‘कवच’ तकनीक को सभी मार्गों पर लागू करने, रेलवे का आधुनिकीकरण करने और नई भर्तियों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

@hansraj_meena…एक समय था जब रेल दुर्घटना होने पर, पत्रकारों के सवालों पर रेलमंत्री का इस्तीफा हो जाता था। दूसरा अमृतकाल का दौर है, जहां आए दिन रिकॉर्ड रेल दुर्घटनाएं हो रही है लेकिन मीडिया में ना कोई बहस। ना हल्ला बोल। ना दंगल। शर्मनाक। #अश्विनी_वैष्णव_इस्तीफा_दो

https://x.com/HansrajMeena/status/1802626753476825315?t=7D-CPXRjJo2O4-p6fRW6gg&s=19

क्या मोदी सरकार इस हादसे के बाद जागेगी? या फिर यह दुर्घटना भी सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएगी?

 

**[आगे की जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें]**

Shambhoo Dwip
Author: Shambhoo Dwip

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